बुरहानपुर में सिंधी बस्ती से महाराष्ट्र के लोनी को जोड़ने वाली करीब 55 करोड़ रुपए की लागत की सड़क निर्माण प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। परियोजना के तहत तैयार हो रही इस सड़क पर निर्माण पूरा होने से पहले ही गुणवत्ता, भारी वाहनों की आवाजाही और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों और विरोध के बाद अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
यह सड़क दोनों राज्यों के बीच आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। करीब 55 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट पर काम जारी है, लेकिन शुरुआती चरण से ही इसके मानकों को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की चिंताएं सामने आने लगी हैं।
गुणवत्ता पर उठे सवाल और एजेंसी का पक्ष
स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सड़क का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन उससे पहले ही सतह से सरिया उखड़ने लगे हैं। कांग्रेस जिला प्रवक्ता निखिल खंडेलवाल ने दावा किया कि तय मानकों की अनदेखी के चलते सड़क की दीर्घकालिक टिकाऊपन पर असर पड़ सकता है।
वहीं, निर्माण से जुड़ी एजेंसी वीएसआर प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के इंचार्ज दीपक राजपूत ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सड़क का निर्माण निर्धारित डीपीआर और तय तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार ही किया जा रहा है। एजेंसी का दावा है कि निर्माण में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही है।
जाम में फंसी प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां
सड़क पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए दोनों सिरों पर प्रतिबंध संबंधी बैनर लगाए गए हैं। इसके बावजूद धड़ल्ले से भारी वाहन इस संकरे मार्ग से गुजर रहे हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बन रही है।
हाल ही में स्थिति तब और स्पष्ट हुई जब इस मार्ग पर लगे जाम में एसडीएम पल्लवी पौराणिक और सिटी मजिस्ट्रेट की सरकारी गाड़ियां भी फंस गईं। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को सड़क पर उतरना पड़ा और खुद वाहनों को हटवाकर रास्ता साफ कराना पड़ा। प्रतिबंध के बावजूद भारी वाहनों की बेरोकटोक एंट्री पर स्थानीय वाहन चालकों में भी नाराजगी है।
प्लांट में मजदूरों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इसी सड़क निर्माण के लिए सामग्री तैयार करने वाले प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के पास सुरक्षा उपकरणों का अभाव देखा गया। मौके पर कई मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी शूज और ग्लव्स के भारी मशीनों के बीच काम करते नजर आए।
मजदूरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें रोजाना करीब 500 रुपए मजदूरी मिलती है, लेकिन ठेकेदार की ओर से सुरक्षा किट या उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते। कुछ समय पहले इसी क्षेत्र में एक मजदूर की दुर्घटना में हुई मौत के बाद प्लांट में सुरक्षा इंतजामों को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
प्लांट इंचार्ज दीपक राजपूत ने पूर्व में हुई मजदूर की मौत को कार्यस्थल पर सुरक्षा चूक से जोड़ने से इंकार करते हुए इसे अन्य दुर्घटना बताया है। हालांकि, बढ़ते विरोध के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान ले लिया है। एसडीएम पल्लवी पौराणिक ने संबंधित विभाग और ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
सांसद ने दिए जांच के आदेश
खंडवा-बुरहानपुर के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मामले पर संज्ञान लेते हुए सड़क की गुणवत्ता और श्रमिकों की सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता बताया है। सांसद ने कहा कि डीपीआर के मुताबिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना एजेंसी की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो वे खुद मौके का निरीक्षण करेंगे और जांच के निर्देश देंगे। साथ ही, मजदूरों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए भी एजेंसी को पाबंद किया जाएगा।
