मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बेमौसम हुई अचानक बारिश से किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। पानी की किल्लत और सूखे जैसे हालात के बीच हुई इस मानसूनी फुहार को किसानों ने राहत की सौगात बताया है। इससे उन खेतों में बोई गई फसलों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है, जहां सिंचाई के साधन न होने के कारण अंकुरण रुक गया था।
दलहनी और तिलहनी फसलों को सबसे ज्यादा फायदा
इस सीजन में पानी की कमी को भांपते हुए जिले के किसानों ने पारंपरिक गेहूं की खेती से दूरी बनाई। इसके बजाय उन्होंने चना, सरसों, राई और मसूर जैसी दलहनी और तिलहनी फसलों की बुवाई पर जोर दिया। हालांकि, पर्याप्त पानी न मिलने के कारण कई खेतों में बीज जमीन के भीतर ही अटके हुए थे और अंकुरण की रफ्तार महज 30 प्रतिशत तक सिमट कर रह गई थी। अब अचानक हुई इस बारिश से खेतों की मिट्टी में गहरी नमी पहुंच गई है, जिससे अटके हुए बीजों के तेजी से उगने का रास्ता साफ हो गया है।
'भगवान के आशीर्वाद जैसी है यह बारिश'
फसलों की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए स्थानीय किसान संदीप चौधरी ने इस बेमौसम बारिश को किसी वरदान से कम नहीं बताया।
संदीप चौधरी ने कहा- "पानी की तंगी के चलते खेतों में फसल का अंकुरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। कई जगहों पर सिर्फ तीस फीसदी तक की ही पैदावार उभर पाई थी। इस मानसूनी बारिश से जमीन को पर्याप्त नमी मिल गई है, जिससे बाकी बचे बीजों को भी अंकुरित होने में मदद मिलेगी।"
उन्होंने आगे कहा कि यह बारिश अन्नदाताओं के लिए भगवान के आशीर्वाद जैसी है, जिससे फसलें लहलहा उठेंगी और बेहतर पैदावार की उम्मीद फिर से जाग गई है।
