नसीराबाद। निकाय चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही नगर पालिका नसीराबाद में चुनावी सरगर्मियां अब चरम पर बढ़ने लगी हैं। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आरएलपी ने अपने-अपने प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतार दिए है। वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों को मनाने और नाम वापसी के लिए राजनीतिक दलों की कवायद तेज हो गई है। नाम वापसी की अंतिम तारीख 3 सितंबर दोपहर 3 बजे निर्धारित है। इसके बाद ही चुनावी मैदान में डटे प्रत्याशियों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। भाजपा ने सभी 20 वार्डों में प्रत्याशी उतारकर चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है। पार्टी प्रत्याशियों को जीत की दहलीज तक पहुंचाने के लिए चुनाव प्रभारी वीरेंद्र शर्मा और संयोजक अर्जुन नलिया राजनीतिक समीकरणों को साधने में जुटे हुए हैं। दोनों नेता प्रत्याशी चयन से लेकर संभावित बागियों और निर्दलीय उम्मीदवारों तक हर मोर्चे पर रणनीतिक चाल चल रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि चुनावी मैदान में विरोधी खेमे को किसी भी स्तर पर बढ़त नहीं लेने दी जाए। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी चुनावी बिसात पर अपनी गोटियां चलनी शुरू कर दी हैं। कांग्रेस नेता अजय गौड़ और ब्लॉक अध्यक्ष योगेश परिहार वार्डवार समीकरणों को मजबूत करने तथा भाजपा के सामने चुनौती खड़ी करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए भाजपा को घेरने के लिए स्थानीय मुद्दे सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकते हैं। आरएलपी प्रभारी रमेश जांगिड़ ने भी नगर पालिका के 20 वार्डों में से 9 वार्डों में अपने प्रत्याशियों को चुनावी दंगल में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया है। ऐसे में कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के सामने आरएलपी भी वोटों में सेंधमारी की चुनौती खड़ी कर सकती है। वर्तमान स्थिति के अनुसार 20 वार्डों के लिए भाजपा के 20, कांग्रेस के 20, आरएलपी के 9 और निर्दलीय 31 सहित कुल 80 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। हालांकि नाम वापसी के दौरान करीब 10 निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान छोड़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो अधिकांश वार्डों में मुकाबला राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच सीधा होने के आसार बन जाएंगे। इस चुनाव में सबसे बड़ा स्थानीय मुद्दा सड़कों की बदहाली और जगह-जगह गहरे गड्ढे बनते नजर आ रहे हैं। बस स्टैंड से आवासन मंडल तथा नांदला, बुबानिया और धोलादांता मार्ग की खराब हालत को लेकर आमजन में नाराजगी है। कांग्रेस और आरएलपी इन सड़कों की बदहाली को भाजपा के खिलाफ चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं। खासकर उन स्थानो पर जहां सड़कें लंबे समय से बदहाल हैं। विपक्षी प्रत्याशी इस चुनाव में मतदाताओं के बीच यह सवाल मजबूती से उठा सकते हैं। भाजपा के विकास के दावों के बावजूद सड़क के गड्ढे भाजपा प्रत्याशियों के लिए महज आवागमन की परेशानी नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति में भी बड़ा रोड़ा बन सकते हैं। भाजपा के रणनीतिकार वीरेंद्र शर्मा और अर्जुन नलिया चुनाव प्रचार के दौरान डबल इंजन सरकार के साथ ट्रिपल इंजन सरकार का मुद्दा उठाकर नगर के विकास को गति देने का संदेश मतदाताओं तक पहुंचा सकते हैं। पार्टी का प्रयास रहेगा कि केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय में एक ही विचारधारा की सरकार होने से विकास कार्यों को तेजी मिलने का तर्क मतदाताओं के सामने रखा जाए। लेकिन विपक्ष यदि सड़कों की बदहाली, गड्ढों की समस्याओं को केंद्र में रखकर भाजपा को घेरने में सफल रहा, तो ‘ट्रिपल इंजन’ का नारा कितना असरदार साबित होगा, यह चुनाव परिणाम ही तय करेंगे। फिलहाल नसीराबाद की चुनावी शतरंज में हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी चाल चल रहा है। 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर साफ होगी कि मुकाबला सीधा है या कई वार्डों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समीकरणों को उलटने की ताकत रखते हैं।