नीमच। जिले के सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए भोजन और पोषण आहार तैयार करने वाली महिला रसोइयों एवं स्वयं सहायता समूहों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने से कई रसोइया और समूह संचालक कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। लंबित भुगतान की मांग को लेकर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना एवं सांझा चूल्हा रसोइया संघ ने प्रदेश अध्यक्ष माया बैरागी के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।संघ ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में तय मेनू के अनुसार नियमित रूप से मध्याह्न भोजन तैयार कराया जा रहा है, लेकिन जुलाई और अगस्त माह की भोजन पकाने की लागत तथा रसोइयों का मानदेय अब तक जारी नहीं किया गया है। वहीं जून माह के 15 दिनों का मानदेय पिछले करीब तीन वर्षों से लंबित बताया गया है। संघ के अनुसार, भुगतान के लिए बार-बार गुहार लगाने के बावजूद बजट आवंटन नहीं होने का हवाला देकर मामले को टाला जा रहा है। इसके चलते गरीब महिला रसोइयों को राशन और भोजन सामग्री की व्यवस्था के लिए उधार लेना पड़ रहा है।आंगनबाड़ी केंद्रों में पूरक पोषण आहार और नाश्ता व्यवस्था संभालने वाली महिलाओं का जुलाई माह से भुगतान लंबित होने की बात भी ज्ञापन में कही गई है। वहीं संघ ने एनआरएलएम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ स्वयं सहायता समूहों पर ऋण लेने का दबाव बनाया जा रहा है तथा ऋण लेने से इनकार करने पर काम का अनुबंध निरस्त करने की धमकी दी जा रही है।ज्ञापन के माध्यम से संघ ने जुलाई-अगस्त की भोजन लागत राशि एवं रसोइयों का लंबित मानदेय तत्काल जारी करने, जून के 15 दिनों का तीन साल से अटका मानदेय भुगतान करने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों की पूरक पोषण आहार एवं टीएचआर (THR) की बकाया राशि जारी करने की मांग की है। साथ ही स्वयं सहायता समूहों पर अनावश्यक कार्रवाई रोकने और एनआरएलएम ऋण लेने के दबाव को समाप्त करने की मांग रखी गई है।संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो जिलेभर की रसोइया चूल्हा बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगी। संघ के अनुसार यह मामला जिले के करीब 830 स्वयं सहायता समूह संचालकों और 2200 महिला रसोइयों से जुड़ा है। समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों की भोजन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।