राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की आत्महत्या के मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस साल पांच महीने से भी कम समय में बल के 19 कर्मियों की जान जाने की मीडिया रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लिया है।

शुक्रवार को जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव और सीआरपीएफ के महानिदेशक (DG) को नोटिस जारी किया गया है। आयोग ने दोनों शीर्ष अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

पांच साल के आंकड़े और मानवाधिकार उल्लंघन का सवाल

आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए ये तथ्य सही हैं, तो यह देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में कार्यरत जवानों के जीवन के अधिकार के हनन का गंभीर मामला है।

सामने आए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल यानी 2025 में सीआरपीएफ के 59 जवानों ने अपनी जान दी थी, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक आंकड़ा है। इसके अलावा, पिछले पांच सालों (2021 से 2025) के दौरान बल के कुल 281 जवानों ने आत्महत्या की है। इनमें से करीब 216 जवान अपनी ड्यूटी के दौरान ही इस कदम तक पहुंचे।

साल-दर-साल आत्महत्या के आंकड़े

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, सीआरपीएफ में आत्महत्या के मामले लगातार सामने आते रहे हैं:

  • 2021: 57 मामले
  • 2022: 43 मामले
  • 2023: 57 मामले
  • 2024: 46 मामले
  • 2025: 59 मामले

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अब आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय और बल के शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि जवानों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल के दबाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।