आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विंध्य के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव किस कदर भारी पड़ रहा है, इसकी बानगी रीवा जिले की त्योंथर तहसील के ग्राम पंचायत 'डीही' में साफ देखी जा सकती है। गांव की बड़ी नहर से लेकर मुख्य बस्ती और शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय तक जाने वाले मुख्य मार्ग पर आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।
कागजों में उलझी योजना, जमीन पर कीचड़ और मुश्किलें
ग्रामीणों के मुताबिक, करीब तीन साल पहले इस रास्ते पर सिर्फ मिट्टी डाली गई थी और दो साल पहले पंचायत स्तर से दो छोटी पुलियों का निर्माण कराया गया था। इसके बाद से पूरा मार्ग प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर रह गया है।
जब भी ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग को लेकर अधिकारियों या स्थानीय प्रतिनिधियों के पास पहुंचते हैं, उन्हें एक ही रटा-रया जवाब मिलता है कि यह मार्ग 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' में शामिल कर लिया गया है। हालांकि, कागजी कार्रवाई के इस आश्वासन के सालों बाद भी जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई है।
एंबुलेंस न पहुंचने से मरीज की मौत
सड़क न होने का यह दर्द तब जानलेवा साबित हुआ जब हाल ही में गांव के एक व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ने पर कोई भी वाहन डीही गांव तक नहीं पहुंच सका। समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण मरीज ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की बदहाली का आलम यह है कि किसी की मृत्यु होने पर शवयात्रा (अर्थी) निकालने के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ती है। कीचड़ और उबड़-खाबड़ रास्ते के कारण एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन गांव में प्रवेश करने से कतराते हैं।
जनप्रतिनिधियों से गुहार
लगातार प्रशासनिक अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान वोट मांगने आने वाले नेता जीतने के बाद गांव की सुध लेना भूल जाते हैं।
ग्रामीणों ने रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा और क्षेत्रीय विधायक से दो टूक गुहार लगाई है कि फाइलों के फेर से निकालकर इस सड़क का जल्द से जल्द पक्का निर्माण कराया जाए, ताकि आपात स्थिति में किसी अन्य परिवार को अपनों को न खोना पड़े।
