मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रतापगढ़ में आयोजित समारोह के दौरान उदयपुर संभाग के 7 जिलों के लिए 924 करोड़ रुपये से अधिक के 1,452 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरे के दौरान स्थानीय वन उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए राजससंघ और कॉनफैड के बीच एमओयू का आदान-प्रदान हुआ, साथ ही 'वनगिरि' ब्रांड के तहत पहले शहद उत्पाद 'आदिपराग' को लॉन्च किया गया।
समारोह में कुल 668 करोड़ रुपये लागत के 1,029 विकास कार्यों का शिलान्यास और 256 करोड़ रुपये लागत के 423 कार्यों का लोकार्पण किया गया। इनमें सड़कों के सुदृढ़ीकरण, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। उदयपुर जिले में 166.80 करोड़ रुपये के 526 कार्य, डूंगरपुर में 189.85 करोड़ रुपये के 105 कार्य और चित्तौड़गढ़ में 164.57 करोड़ रुपये के 88 कार्य इन परियोजनाओं का हिस्सा हैं।
जनजातीय विरासत और आजीविका पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय कला और सांस्कृतिक परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। सरकार इस विरासत के संरक्षण के साथ स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। बम्बोरी में आयोजित ग्राम विकास चौपाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीणों की आवश्यकताओं को नजदीक से समझने का मौका मिला।
राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने इस दौरान कहा कि सरकार के कार्यकाल में प्रतापगढ़ समेत पूरे संभाग में पेयजल, शिक्षा और विद्युत के क्षेत्र में बुनियादी बदलाव आए हैं। कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने दीपेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
रोजगार और जलापूर्ति पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने रोजगार और भर्ती प्रक्रिया का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में 1.90 लाख पदों पर नियुक्तियां दी हैं, जबकि 1.22 लाख पदों पर प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा वर्ष 2026 के लिए सवा लाख पदों का भर्ती कैलेंडर भी जारी किया जा चुका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ई-लाइब्रेरी के लिए अटल ज्ञान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। वहीं, जल संकट से निपटने के लिए रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल और नर्मदा व किशाऊ परियोजनाओं पर काम चल रहा है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक सभी जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
