बेरोजगारी के इस दौर में खुद का बिजनेस शुरू करने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए डेयरी फार्मिंग एक बेहद आकर्षक और स्थिर विकल्प बनता जा रहा है। हालांकि, सही जानकारी और अनुभव के अभाव में कई लोग इस दिशा में कदम नहीं बढ़ा पाते हैं। इस व्यवसाय को टिकाऊ और लाभदायक बनाने के लिए सही नस्ल का चयन, वैज्ञानिक रखरखाव और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग बेहद जरूरी है।
सही नस्ल के पशुओं का चयन
डेयरी फार्म का मुनाफा सीधे तौर पर पशुओं के दूध उत्पादन और उनकी सेहत पर निर्भर करता है। क्षेत्रीय मौसम के हिसाब से पशुओं का चयन करना सबसे पहला और अहम कदम है। भारतीय वातावरण में आसानी से ढलने वाली और कम बीमार पड़ने वाली नस्लों का चुनाव करना मुनाफे की कुंजी है।
गाय की नस्लों में गीर, साहीवाल, थारपारकर और हरियाणा को सबसे बेहतर माना जाता है। ये भारतीय जलवायु में आसानी से ढल जाती हैं, इनमें बीमारियां कम होती हैं और इनके A2 दूध की बाजार में प्रीमियम कीमत मिलती है। इसके अलावा, जर्सी और होल्स्टिन फ्रिजियन (HF) नस्ल की गायें प्रतिदिन बहुत ज्यादा दूध देती हैं, हालांकि इन्हें ठंडे वातावरण और विशेष देखरेख की जरूरत होती है।
भैंसों में मुर्रा और मेहसाणा काफी अच्छी नस्लें हैं। मुर्रा को ब्लैक गोल्ड भी कहा जाता है, जिसके गाढ़े और उच्च फैट वाले दूध की डेयरी प्रोडक्ट्स, घी और मावा निर्माताओं के बीच भारी मांग रहती है।
दूध उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक उपाय
पशु पालना ही काफी नहीं है, बल्कि उनसे ज्यादा से ज्यादा लाभ हासिल करना वैज्ञानिक तरीकों पर निर्भर करता है। पशुओं के आहार में 60 प्रतिशत हरा चारा, 40 प्रतिशत सूखा चारा और प्रति 2.5 लीटर दूध उत्पादन पर 1 किलोग्राम कंसंट्रेट मिक्स व मिनरल मिक्सचर शामिल करना जरूरी है।
रोग नियंत्रण के लिए टीकाकरण समय पर होना चाहिए। खुरपका-मुंहपका (FMD) और ब्रुसेलोसिस का टीका समय पर लगवाना अनिवार्य है। इसके अलावा, हवादार शेड, साफ फर्श और गर्मी के तनाव से बचाने के लिए शेड में फॉगर्स और पंखों की व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि तनावमुक्त पशु अधिक दूध देते हैं।
सरकारी योजनाएं और सब्सिडी
पशुपालन को आर्थिक रूप से मजबूती देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं, जिनके तहत 25 से लेकर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी और आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध कराया जा रहा है।
- नाबार्ड और AHIDF योजना: राष्ट्रीय पशुधन मिशन और AHIDF के तहत सामान्य वर्ग के लिए 25% और SC/ST व महिला आवेदकों के लिए 33.33 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: छोटे और मध्यम डेयरी सेटअप के लिए बिना किसी गारंटी के 50,000 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के कर्ज की व्यवस्था है।
- नंदिनी कृषक समृद्धि योजना: उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में देसी गायों (गीर और साहीवाल) की यूनिट स्थापित करने पर 50 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी का प्रावधान है।
- पशु किसान क्रेडिट कार्ड: पशुओं के दैनिक चारे और रखरखाव के खर्च के लिए सिर्फ 4 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर वर्किंग कैपिटल लोन मिलता है।
प्रमुख पशुपालन योजनाएं एक नजर में
योजना का नाम मुख्य क्षेत्र मिलने वाली छूट व सब्सिडी
राष्ट्रीय गोकुल मिशन
देसी गाय संरक्षण व नस्ल सुधार
मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान व तकनीकी सपोर्ट
राष्ट्रीय पशुधन मिशन
बकरी, मुर्गी व सूअर पालन
प्रोजेक्ट लागत पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी
पशुधन बीमा योजना
पशु दुर्घटना व मृत्यु सुरक्षा
प्रीमियम पर 50 से 70 प्रतिशत सब्सिडी
AHIDF स्कीम
डेयरी व चारा प्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर
3 प्रतिशत ब्याज दर में छूट व क्रेडिट गारंटी
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना
देसी नस्ल की 25 गायों की यूनिट
50 प्रतिशत तक राज्य स्तरीय अनुदान
बैंक लोन और सब्सिडी के लिए आवेदन प्रक्रिया
लोन और सब्सिडी प्राप्त करने के लिए सबसे पहले पशुओं की संख्या, खरीद लागत, शेड निर्माण, चारे का खर्च और अनुमानित कमाई का पूरा ब्योरा देते हुए एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करें।
इसके बाद आधार कार्ड, पैन कार्ड, जमीन के दस्तावेज जैसे खसरा-खतौनी या न्यूनतम 5 साल का लीज एग्रीमेंट, 6 से 12 महीने का बैंक स्टेटमेंट और अगर प्रशिक्षण लिया हो तो ट्रेनिंग सर्टिफिकेट तैयार कर लें। इन दस्तावेजों के साथ नजदीकी कमर्शियल, ग्रामीण या कोऑपरेटिव बैंक में आवेदन दें। बैंक अधिकारी साइट वेरिफिकेशन कर लोन स्वीकृत करते हैं, जिसके बाद पहली किस्त जारी होते ही बैंक नाबार्ड या सरकारी पोर्टल पर सब्सिडी क्लेम दाखिल करता है।
