ग्राम कुई माल में राजस्व भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी सामने आई है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर इस पूरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि इस जमीन के हस्तांतरण से पहले ग्राम पंचायत या स्थानीय निवासियों की कोई सहमति नहीं ली गई। आवेदक ग्रामीणों के मुताबिक, इस जमीन पर करीब 25 परिवार लंबे समय से खेती-किसानी कर रहे हैं और उनके आशियाने भी इसी भूमि पर बने हुए हैं।
विस्थापन और आजीविका का संकट
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह राजस्व भूमि वन विभाग को सौंप दी जाती है, तो स्थानीय परिवारों के सामने गंभीर विस्थापन और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। कई भूमिहीन परिवार वर्षों से इसी जमीन पर घर बनाकर गुजर-बसर कर रहे हैं।
इसके अलावा, गांव में भविष्य की नल-जल योजना और आवास पट्टों के वितरण के लिए भी इसी भूमि की आवश्यकता बताई गई है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि सार्वजनिक उपयोग और आजीविका से जुड़ी यह जमीन दूसरे विभाग को दे दी जाती है, तो स्थानीय विकास कार्य प्रभावित होंगे।
दूसरे जिले के व्यक्ति पर अवैध कब्जे का आरोप
ज्ञापन में प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान एक अन्य गंभीर मामले की ओर भी खींचा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उमरिया जिले के मरवा टोला (शहडोल संभाग) के रहने वाले एक व्यक्ति ने गांव की शासकीय और सार्वजनिक उपयोग वाली जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है।
ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति का कुई माल गांव से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और उसने बाहरी व्यक्ति होने के बावजूद स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण कर रखा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस तथाकथित कब्जे की जांच कर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
प्रशासन से जांच और रोक की मांग
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व भूमि के हस्तांतरण की फाइल की नए सिरे से समीक्षा की जाए और जमीन की मैदानी स्थिति स्पष्ट की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे इस मसले को लेकर आगे और भी मुखर विरोध दर्ज कराएंगे। फिलहाल, मामले में प्रशासनिक स्तर पर तथ्यों की जांच और संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब किए जाने की संभावना है।
