जयपुर। जामडोली स्थित श्री नृसिंह मंदिर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। जन्माष्टमी के अवसर पर पूरा मंदिर परिसर आकर्षक सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और धार्मिक वातावरण से अलौकिक नजर आया। सुबह से ही मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया, जो देर रात तक निरंतर जारी रहा। कान्हा के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह और आतुरता दिखाई दी।

भगवान का विशेष श्रृंगार

इस अवसर पर मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण सहित सभी देवी-देवताओं का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर की साज-सज्जा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। भक्त दीपक शर्मा ने अपनी मेहनत, लगन और भक्ति भावना से भगवान की विशेष झांकी तैयार की। झांकी में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

12 बजे विशेष आरती

जन्माष्टमी के मुख्य आयोजन के रूप में मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव विधि-विधान के साथ मनाया गया। जैसे ही घड़ी की सुइयां मध्यरात्रि के 12 बजे पर पहुंचीं, मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से वातावरण कृष्णमय हो गया। भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक किया गया तथा विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इसके बाद ठाकुरजी को नवीन एवं आकर्षक वस्त्र धारण करवाकर विशेष भोग अर्पित किया गया। श्रद्धापूर्वक आरती के साथ जन्मोत्सव का आनंद मनाया गया।

भजनों पर झूमे श्रद्धालु

शाम से देर रात तक मंदिर परिसर में भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां होती रहीं। कृष्ण भक्ति से ओत-प्रोत भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भक्तजन भक्ति संगीत में झूमते और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते नजर आए। पूरा वातावरण प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।

भक्तों का रहा सहयोग

आयोजन को सफल बनाने में दिनेश सिसोदिया, आनंद पटवा, गोविंद गुर्जर सहित अनेक भक्तों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। महिला भक्त मंडली की पूजा, आशा, सुमन, किरण, यशोदा, मंजू और बसंती देवी सहित अन्य महिलाओं ने भी सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाई।

आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति

श्री नृसिंह मंदिर में आयोजित जन्माष्टमी समारोह ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, करुणा और धर्म के संदेश से जोड़ते हुए आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराई। मंदिर में देर रात तक गूंजते जयकारों और भजनों ने यह संदेश दिया कि जहां सच्ची श्रद्धा और भक्ति होती है, वहां स्वयं भगवान की अनुभूति होती है।