Saturday, 26 September 2026
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हरियाली तीज 2026: इस साल 15 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व, जानें पौराणिक कथा और पूजन सामग्री

संक्षेप में

हरियाली तीज 2026 का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जल व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती के पुनर्मिलन की कथा पढ़ती हैं।

मुख्य बातें

  • हरियाली तीज 2026 की तिथि 15 अगस्त तय है।
  • यह पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
  • माता पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए 108 जन्मों तक तपस्या की थी।
  • इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए निर्जल व्रत रखती हैं।
धर्म
हरियाली तीज 2026: इस साल 15 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व, जानें पौराणिक कथा और पूजन सामग्री

सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, जिनके पुनर्मिलन की स्मृति में सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल हरियाली तीज का यह पावन पर्व 15 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।

108वें जन्म में हुआ था शिव-पार्वती का मिलन

शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने बाल्यावस्था से ही भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया था। इस कठोर संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने 107 जन्मों तक कठिन तपस्या की थी, लेकिन उन्हें भोलेनाथ की प्राप्ति 108वें जन्म में हुई।

सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर ही शिवजी ने माता पार्वती की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसी वजह से देवी पार्वती को 'तीज माता' के रूप में भी पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, 108वें जन्म में माता ने अन्न-जल का त्याग कर वनों में कंद-मूल खाकर या केवल हवा के सहारे सहस्रों वर्षों तक साधना की थी।

हरियाली तीज पर क्या-क्या है जरूरी?

व्रत और पूजन को विधिवत पूरा करने के लिए कुछ खास सामग्रियों को पहले से जुटाना जरूरी होता है। पूजा की थाली में इन चीजों को शामिल किया जाता है:

  • श्रृंगार सामग्री: सिंदूर, मेहंदी, हरी चूड़ियां, बिंदी, महावर, काजल और आभूषण।
  • वस्त्र: माता पार्वती के लिए लाल चुनरी और भगवान शिव के लिए वस्त्र।
  • प्राकृतिक और पूजन वस्तुएं: गीली काली मिट्टी या बालू (शिव-पार्वती की मूर्ति बनाने के लिए), बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और केले का पत्ता।
  • भोग सामग्री: पंचामृत, मौसमी फल और घेवर या ठेकुआ जैसी पारंपरिक मिठाइयां।

व्रत का महत्व और परंपराएं

सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष उत्सव मनाए जाते हैं, जिसमें महिलाएं मिलकर झूला झूलती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं। हरियाली तीज के दिन शिव-पार्वती के पूजन के साथ इस पौराणिक कथा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हरियाली तीज 2026 कब है?

हरियाली तीज का पर्व इस साल 15 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यह सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है।

हरियाली तीज किस भगवान को समर्पित है?

हरियाली तीज का त्योहार मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन दोनों के पुनर्मिलन की कथा का विशेष महत्व है।

हरियाली तीज पर महिलाएं कौन सा व्रत रखती हैं?

सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए हरियाली तीज के दिन निर्जल व्रत रखती हैं।

माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कितने जन्मों तक तपस्या की थी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद 108वें जन्म में शिवजी ने उन्हें स्वीकार किया था।