वैवाहिक सीजन की शुरुआत से ठीक पहले जयपुर के मैरिज गार्डन संचालकों और उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है जिनके यहां जल्द शादियां होनी हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने पिछले दो महीने में शहर के करीब 90 विवाह स्थलों को नोटिस जारी किए हैं। जेडीए की इस कार्रवाई से शहर की आतिशबाजी और समारोह इंडस्ट्री में हड़कंप की स्थिति है।

नोटिस में मुख्य रूप से व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन, बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन, आवासीय क्षेत्रों में संचालन और पार्किंग नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है। जेडीए के इन सख्त रुख के बाद से संचालकों और प्राधिकरण के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।

किराए की जमीन और करोड़ों का कन्वर्जन खर्च

जेडीए की कार्रवाई के दायरे में आने वाले करीब 90 फीसदी मैरिज गार्डन किराए की जमीन पर संचालित हो रहे हैं। यानी जमीन का मालिक कोई और है और संचालन कोई और कर रहा है। जेडीए ने इन संचालकों से जमीन का भू-रूपांतरण (कन्वर्जन) कराकर इसे व्यावसायिक श्रेणी में दर्ज कराने को कहा है।

इस प्रक्रिया में एक से दो करोड़ रुपए तक का खर्च आने का अनुमान है। संचालकों का कहना है कि यह आर्थिक बोझ उठाना उनके लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, खासकर तब जब वे पहले से ही नगर निगम को भारी-भरकम शुल्क चुका रहे हैं।

निगम में जमा होता है लाखों का शुल्क

जयपुर विवाह स्थल समिति के अनुसार, संचालक नगर निगम की संशोधित उपविधि 2012 के तहत नियमित रूप से शुल्क जमा कर रहे हैं। पांच हजार वर्ग गज के एक औसत मैरिज गार्डन पर सालाना करीब 6.93 लाख रुपए का विभिन्न प्रकार का शुल्क बैठता है।

इसमें व्यावसायिक दर से करीब पांच लाख रुपए यूडी टैक्स, 60 हजार रुपए लाइसेंस शुल्क, एक लाख रुपए अनुमति शुल्क (20 रुपए प्रति गज), 30 हजार रुपए सफाई शुल्क और तीन हजार रुपए फायर एनओसी की फीस शामिल है। संचालकों का तर्क है कि जब वे सभी वैधानिक शुल्क निगम को दे रहे हैं, तो जेडीए द्वारा अलग से भू-रूपांतरण का दबाव बनाया जाना अनुचित है।

पार्किंग और चार मुख्य बिंदु बने विवाद की वजह

ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठकों में शहर में लगने वाले जाम के मुख्य कारणों में मैरिज गार्डन्स में पर्याप्त पार्किंग का अभाव भी सामने आया है। नियमों के मुताबिक, विवाह स्थल के लिए कुल जमीन का 40 फीसदी हिस्सा केवल पार्किंग के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है, जिसका कई संचालक पालन नहीं कर पा रहे हैं।

जेडीए मुख्य रूप से चार बिंदुओं के आधार पर नोटिस दे रहा है:

  • विवाह स्थलों का कॉमर्शियल कन्वर्जन न होना
  • बिल्डिंग बायलॉज की अवहेलना
  • 40 फीसदी पार्किंग के प्रावधान की कमी
  • आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक संचालन

प्रशासन और संचालकों का पक्ष

मामले को लेकर जेडीए के डीआईजी आनंद शर्मा ने स्पष्ट किया है कि अभी तक एक भी विवाह स्थल को सील नहीं किया गया है, केवल कमियों और नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं।

दूसरी ओर, जयपुर विवाह स्थल समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पर्वत सिंह भाटी ने बताया कि इस मामले में जेडीए और नगरीय विकास विभाग के आला अधिकारियों से कई दौर की मुलाकात की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार और जेडीए संचालकों की व्यावहारिक समस्याओं पर विचार करेंगे।