जयपुर की एक अदालत ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में पत्नी की ओर से दाखिल अंतरिम गुजारा भत्ते की अर्जी को खारिज कर दिया है। मामले में सुनवाई करते हुए न्यायाधीश कंचन सिंह राजावत ने पत्नी द्वारा हर महीने दो लाख रुपये भरण-पोषण के रूप में दिए जाने की मांग को स्वीकार नहीं किया। पति की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे एडवोकेट पंडित पवन शर्मा ने पत्नी की आर्थिक आत्मनिर्भरता और पति की सीमित आय का हवाला दिया था।
क्या थी पूरी दलील और मामला
सुनवाई के दौरान पत्नी ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर हर महीने दो लाख रुपये गुजारा भत्ता दिलाने की मांग की थी। इस पर पति के वकील ने अदालत को बताया कि उनका मुवक्किल गायन कार्यक्रमों में वाद्ययंत्र बजाकर अपनी आजीविका चलाता है और इसी से परिवार का खर्च चलता है। इसके साथ ही, पक्ष रखते हुए यह तर्क भी दिया गया कि पत्नी चूड़ियां बनाने के कार्य से आय अर्जित करने में सक्षम है और आर्थिक रूप से खुद पर निर्भर रहने की स्थिति में है। दोनों पक्षों की वित्तीय स्थिति और कमाई के साधनों पर गौर करने के बाद अदालत ने पत्नी की यह मांग नामंजूर कर दी।
साल 2019 में हुआ था निकाह
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दोनों पक्षों का निकाह 4 जुलाई 2019 को मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न हुआ था। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच वैवाहिक विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके चलते मामला अदालत तक पहुंचा और अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन दाखिल किया गया था। इस तरह के मामलों में दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति और आय के वास्तविक स्रोतों का आकलन अहम होता है। हालांकि, अंतरिम भरण-पोषण की मांग खारिज होने का यह अर्थ नहीं है कि किसी अन्य वैधानिक अधिकार पर भी अंतिम फैसला आ गया है। इस ताजा jaipur news से जुड़े इस प्रकरण में विस्तृत फैसले की प्रति मिलने के बाद ही कानूनी बिंदुओं की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
