अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा कदम उठाया गया है। नटनी का बारा से मंडावरा तक 22 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाने का नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। करीब 2200 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एनएच विंग की ओर से केंद्र सरकार को भेज दी गई है।
प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण से जयपुर और अलवर के बीच की राह न सिर्फ सुगम होगी, बल्कि वन्यजीवों की आवाजाही भी सुरक्षित हो सकेगी। रोड पिलर्स पर खड़ा होगा, जिसके नीचे से वन्यजीवों के गुजरने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी जाएगी।
रूट में बदलाव से किसानों को राहत, कम होगी दूरी
नटनी का बारा से शुरू होकर धर्मपुरा और कुशालगढ़ होते हुए मंडावरा तक पहुंचने वाले इस नए रूट में कुल आठ गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके अलावा वन विभाग की जमीन भी ली जाएगी। पूर्व में थानागाजी के 'थैंक्यू बोर्ड' के आगे रोड उतारने का स्थानीय स्तर पर कड़ा विरोध हुआ था, जिसके बाद इस नए रूट का प्रस्ताव तैयार किया गया है। नए एलाइनमेंट में थैंक्यू बोर्ड नहीं आने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नटनी का बारा से मंडावर की मौजूदा सड़क मार्ग से दूरी करीब 48 किलोमीटर है। एलिवेटेड रोड के बनने से यह दूरी घटकर लगभग 22 किलोमीटर रह जाएगी, जिससे सफर में करीब 45 मिनट की बचत होगी। यह नया मार्ग आगे जाकर सीधे जयपुर मार्ग से जुड़ेगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा और चार साल का मंथन
सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) के निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई थी कि सरिस्का के बीच से गुजरने वाले एनएच-248ए पर तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से आए दिन वन्यजीवों की जान जा रही है। इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में एलिवेटेड रोड का विकल्प चुना गया। पिछले चार साल से इस परियोजना को लेकर मंथन चल रहा है। इससे पहले राज्य स्तर पर तैयार की गई डीपीआर को खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद नए सिरे से यह संशोधित प्रस्ताव तैयार किया गया है।
पीडब्ल्यूडी एनएच जयपुर के एक्सईएन वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि परियोजना का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
एलिवेटेड रोड के पिलर इतनी ऊंचाई पर बनाए जाएंगे कि वाहनों का शोर भी वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास तक नहीं पहुंचेगा। इस संबंध में कंसल्टेंट कंपनी के जरिए सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है।
