Saturday, 26 September 2026
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जयपुर का रामगढ़ बांध: कैचमेंट एरिया में 386 अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, अखबारों से सार्वजनिक नोटिस जारी करने के आदेश

संक्षेप में

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में मिले 386 अतिक्रमणों को हटाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने व्यक्तिगत नोटिस के बजाय समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक नोटिस जारी करने और 15 दिन के भीतर कब्जा हटाने का आदेश दिया है।

मुख्य बातें

  • रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में 386 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं।
  • अतिक्रमणकारियों में निम्स यूनिवर्सिटी, तीन रिसॉर्ट और दो एलएलपी कंपनियां शामिल हैं।
  • हाईकोर्ट ने समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।
  • कब्जा हटाने के लिए अतिक्रमियों को 15 दिन का समय दिया गया है।
जयपुर संभाग
जयपुर का रामगढ़ बांध: कैचमेंट एरिया में 386 अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, अखबारों से सार्वजनिक नोटिस जारी करने के आदेश

जयपुर की जीवनदायिनी माने जाने वाले रामगढ़ बांध और उसके प्रवाह क्षेत्र में फैले अवैध कब्जों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बांध के कैचमेंट एरिया में चिन्हित 386 अतिक्रमणों का डेटा देखकर नाराजगी जताई और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अब नोटिस-नोटिस का खेल नहीं चलेगा और कागजी औपचारिकताओं का समय बीत चुका है।

निम्स यूनिवर्सिटी और रिसॉर्ट्स के नाम शामिल

हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, बांध के बहाव क्षेत्र में कुल 386 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें निम्स यूनिवर्सिटी के अलावा तीन रिसॉर्ट और दो एलएलपी कंपनियां — सिक्स स्टार लैण्डस्कैप प्राइवेट लिमिटेड और प्लासिविल प्रॉपर्टी बिल्ड एलएलपी (नई दिल्ली) के अवैध निर्माण शामिल हैं।

यह डेटा जयपुर कलक्टर की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने एक विस्तृत रिपोर्ट के रूप में पेश किया। रिपोर्ट के मुताबिक, शाहपुरा की माधोबेणी नदी में 12, विराटनगर की बाणगंगा नदी में 14, जमवारामगढ़ क्षेत्र में 273, आंधी में 6 और आमेर में 81 अतिक्रमण हैं। इनमें से अधिकांश जगहों पर काश्तकारों द्वारा खेती की जा रही है।

अखबारों के जरिए सार्वजनिक नोटिस और 15 दिन की मोहलत

अदालत ने सभी अतिक्रमियों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस भेजने के बजाय राजस्थान पत्रिका और एक अन्य दैनिक समाचार पत्र के माध्यम से सार्वजनिक नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने अतिक्रमियों को कब्जा हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा में कब्जा खुद नहीं हटाने पर प्रशासन जमीन खाली करवाएगा और उसका पूरा खर्च अतिक्रमियों से वसूला जाएगा। इसके साथ ही, बांध के बहाव क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में सबमर्सिबल पंप के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी नलकूपों का मामला और अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कैचमेंट एरिया में बने कुछ नलकूप सरकारी योजनाओं और जलापूर्ति में काम आ रहे हैं, जिनमें जल जीवन मिशन के तहत संचालित 8 नलकूप भी शामिल हैं।

यह पूरा मामला 'राजस्थान पत्रिका' में 11 अगस्त 2011 को 'मर गया रामगढ़' शीर्षक से प्रकाशित फोटो समाचार के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा ली गई स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर चल रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर महीने के तीसरे सप्ताह में होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में कुल कितने अतिक्रमण मिले हैं?

रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में कुल 386 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें निम्स यूनिवर्सिटी, तीन रिसॉर्ट और दो एलएलपी कंपनियां शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने अतिक्रमियों को हटाने के लिए कितना समय दिया है?

हाईकोर्ट ने अतिक्रमियों को कब्जा हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया है, जिसके बाद प्रशासन खुद कार्रवाई कर खर्च वसूलेगा।

अतिक्रमियों को नोटिस देने की क्या प्रक्रिया तय की गई है?

अदालत ने व्यक्तिगत नोटिस भेजने के बजाय दो प्रमुख समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

यह मामला किस आधार पर कोर्ट में चल रहा है?

यह मामला 11 अगस्त 2011 को 'राजस्थान पत्रिका' में प्रकाशित 'मर गया रामगढ़' शीर्षक से फोटो समाचार के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा ली गई स्वप्रेरणा याचिका पर चल रहा है।