मेटा ने अमेरिका के 52 राज्यों और क्षेत्रों के अटॉर्नी जनरल के साथ हुए एक बड़े कानूनी समझौते के तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम पर किशोर यूजर्स के लिए नए सुरक्षा उपायों का ऐलान किया है। 26 अगस्त 2026 को घोषित इस समझौते के तहत मेटा 10 साल में किश्तों में लगभग 18 अरब डॉलर चुकाएगा। यह कदम कैलिफोर्निया और 28 अन्य अमेरिकी राज्यों द्वारा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के नकारात्मक असर और अवैध डेटा कलेक्शन को लेकर दायर मुकदमों के बाद उठाया गया है।
दो घंटे का टाइम लिमिट और नाइट मोड
इस नए समझौते के तहत मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए डिफ़ॉल्ट रूप से दो घंटे की दैनिक समय सीमा तय की है। किशोर इस लिमिट को केवल माता-पिता की अनुमति से ही हटा सकेंगे। इसके अलावा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक 'नाइट मोड' एक्टिव रहेगा, जिससे इस अवधि में टीन यूजर्स फीड, स्टोरीज, रील्स या एक्सप्लोर सेक्शन न तो देख पाएंगे और न ही कोई पोस्ट शेयर कर पाएंगे।
इसी तरह स्कूल के घंटों के दौरान, यानी सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक, नोटिफिकेशन डिफ़ॉल्ट रूप से म्यूट रहेंगे। हालांकि इन सभी पाबंदियों के दायरे से डायरेक्ट मैसेज (DMs) को बाहर रखा गया है। लगातार स्क्रीन टाइम पर नजर रखने के लिए टीन यूजर्स को हर 15 मिनट के बाद प्रॉम्प्ट मिलेंगे, जबकि कुल इस्तेमाल 60 और 90 मिनट तक पहुंचने पर अलग से चेतावनी संदेश दिखाई देंगे।
एल्गोरिदम फीड और लाइक पर रोक
लत लगाने वाले वीडियो फीचर्स और दिखावे की तुलना से होने वाली एंग्रीटी को कम करने के लिए मेटा ने कई बड़े बदलाव किए हैं। टीन यूजर्स अब नॉन-एल्गोरिदमिक फीड को डिफ़ॉल्ट रूप से चुन सकेंगे और ऑटोप्ले फीचर को भी बंद कर सकेंगे। इसके अलावा, पोस्ट पर मिलने वाले लाइक्स और रिएक्शंस की संख्या डिफ़ॉल्ट रूप से छिपा दी जाएगी।
कंपनी ने कॉस्मेटिक सर्जरी फिल्टर्स पर पहले से लगे बैन को बढ़ाते हुए टीन यूजर्स के लिए "एक्सट्रीम मेकअप फिल्टर्स" के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी है। मेटा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह गलत जन्मतिथि डालकर वयस्कों की तरह अकाउंट बनाने वाले नाबालिगों की पहचान करने के लिए अपनी तकनीक को और मजबूत करेगा। इसके साथ ही इंस्टाग्राम और फेसबुक पर टीन अकाउंट्स को डिफ़ॉल्ट रूप से प्राइवेट रखा जाएगा और संदिग्ध वयस्कों की पहुंच उन तक सीमित की जाएगी।
राइवल ऐप्स पर दबाव और उम्र सत्यापन की चुनौती
इस समझौते का एक अहम पहलू यह है कि मेटा अपने प्रतिद्वंद्वी ऐप्स - यूट्यूब और टिकटॉक - को भी इस मानक को अपनाने के लिए कह रहा है। समझौते की कुल राशि का करीब 30 प्रतिशत, यानी 5.3 अरब डॉलर, तभी जारी किया जाएगा जब ये राइवल प्लेटफॉर्म्स इसी तरह के कड़े नियंत्रण लागू करेंगे। मेटा ने यह भी कहा है कि यदि इंडस्ट्री के दूसरे प्लेटफॉर्म्स इस समझौते से जुड़ते हैं, तो वह दैनिक समय सीमा को घटाकर एक घंटा प्रति ऐप कर देगा।
हालांकि, इन सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। बाल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे आसानी से अपनी उम्र की गलत जानकारी देकर इन पाबंदियों को पार कर लेते हैं। ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए जानकारों ने बताया कि वहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन के बावजूद अध्ययन में यह सामने आया कि टीन यूजर्स ने नियमों के विकल्प ढूंढ लिए हैं। मेटा ने इस पर जोर दिया है कि उम्र के सत्यापन की जिम्मेदारी सिर्फ सोशल मीडिया कंपनियों की नहीं, बल्कि ऐप स्टोर चलाने वाली कंपनियों जैसे एप्पल और गूगल की होनी चाहिए, जो डाउनलोड से पहले माता-पिता की अनुमति सुनिश्चित करें।
