Saturday, 26 September 2026
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महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में पूजा और 16 पुजारियों की परंपरा; जानिए सावन में क्या हैं नियम

संक्षेप में

उज्जैन के महाकाल मंदिर में सावन माह के दौरान भस्म आरती सोमवार को रात 2:30 बजे और अन्य दिनों में तड़के 3 बजे होती है। यह आरती केवल 16 अधिकृत पुजारियों द्वारा संपन्न कराई जाती है, जिसमें विशेष ड्रेस कोड और वैदिक मंत्रों का पालन किया जाता है।

मुख्य बातें

  • सावन में सोमवार को महाकाल को रात 2:30 बजे और मंगलवार से रविवार तक तड़के 3 बजे जगाया जाता है।
  • भस्म आरती केवल 16 अधिकृत पुजारी या उनके परिवार के सदस्य ही कर सकते हैं।
  • शिवलिंग के संरक्षण के लिए केवल pH 7 से 9 के बीच का अल्कलाइन जल चढ़ाया जाता है।
  • मंदिर में रोजाना अर्पित होने वाले चार टन फूलों से अगरबत्ती और धूप बनाई जाती है।
धर्म
महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में पूजा और 16 पुजारियों की परंपरा; जानिए सावन में क्या हैं नियम

सावन महीने की शुरुआत के साथ ही उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में देश भर से श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है। महाकाल के दर्शन करने वाले अधिकांश भक्तों की इच्छा तड़के होने वाली भस्म आरती देखने की होती है, लेकिन इससे जुड़ी कई ऐसी परंपराएं और नियम हैं जिनकी जानकारी आम लोगों को कम ही होती है। भगवान महाकाल की पूजा यहां एक राजा के रूप में की जाती है और उन्हें जगाने से लेकर शयन आरती तक हर प्रक्रिया तय वैदिक नियमों के तहत संपन्न होती है।

सावन के दौरान हर सोमवार को भगवान महाकाल को रात 2:30 बजे जगाया जाता है, जबकि मंगलवार से रविवार तक यह समय तड़के 3 बजे का रहता है। मंदिर में होने वाली इस आरती का वास्तविक नाम मंगला आरती है, जो भस्म अर्पित किए जाने के कारण वर्षों पहले भस्म आरती के नाम से प्रसिद्ध हो गई।

निराकार से साकार स्वरूप के दर्शन

मंदिर के पट खुलने से लेकर भस्म रमाने तक भगवान निराकार स्वरूप में रहते हैं। इसके बाद उनका राजसी शृंगार किया जाता है। भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल को आभूषण, रुद्राक्ष माला, मुंडमाला, बेलपत्र, शेषनाग का रजत मुकुट और फल-मिष्ठान का भोग लगाकर साकार स्वरूप में सजाया जाता है।

परंपरा के अनुसार, भस्म आरती केवल 16 अधिकृत पुजारी या उनके परिवार के सदस्य ही कर सकते हैं। हर छह माह में इन पुजारियों का क्रम बदलता है। भस्म आरती के दौरान भगवान दिगंबर स्वरूप में रहते हैं, इसलिए परंपरा के अनुसार महिलाओं को भस्म अर्पित होने तक घूंघट की आड़ लेने के लिए कहा जाता है। शृंगार पूरा होने के बाद महिलाएं घूंघट हटा सकती हैं।

भिक्षा मांगने की परंपरा और भस्म तैयारी

पुजारी महेश शर्मा के मुताबिक, भस्म आरती की तैयारी एक दिन पहले ही शुरू हो जाती है। ओंकारेश्वर मंदिर के पीछे स्थित भस्म कक्ष में पांच कंडों पर कपूर रखकर धूनी प्रज्ज्वलित की जाती है। इसी दिन वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल के भोग के लिए भिक्षा भी मांगी जाती है।

पुजारी परिवार की ओर से नियुक्त व्यक्ति शाम करीब 4 बजे पीतल की बड़ी थाली लेकर शहर की 20 से अधिक दुकानों से प्रसाद, फूल, दूध, मिठाई, फल और पान एकत्र करता है। इसे 'भगवान का कंड्या' कहा जाता है। इसी भिक्षा से एकत्र सामग्री का भोग आरती के दौरान भगवान को अर्पित किया जाता है।

16 मंत्रों का अभिषेक और विशेष ड्रेस कोड

पुजारी सुबह स्नान कर मंदिर पहुंचते हैं और कोटि तीर्थ के जल से खुद को शुद्ध करने के बाद घंटी बजाकर मंदिर में प्रवेश की आज्ञा लेते हैं। वीरभद्र का स्नान कराने के बाद मुख्य द्वार का शुद्धिकरण किया जाता है। इसके बाद ध्यान, आह्वान, आसन, पाद्य, अर्घ्य और आचमन सहित कुल 16 मंत्रों के साथ पंचामृत और सप्त नदियों के जल से अभिषेक किया जाता है।

ज्योतिर्लिंग का क्षरण न हो, इसके लिए अर्पित किए जाने वाले जल की pH वैल्यू जांची जाती है। शिवलिंग पर केवल pH 7 से 9 के बीच का अल्कलाइन जल ही चढ़ाया जाता है। भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में उपस्थित रहने वाले पुजारियों और श्रद्धालुओं के लिए महिलाओं के लिए साड़ी और पुरुषों के लिए सोला धोती पहनना अनिवार्य होता है।

फूलों से अगरबत्ती निर्माण और अन्य व्यवस्थाएं

महाकाल मंदिर में रोजाना देश भर के भक्त चार टन से अधिक पुष्प अर्पित करते हैं। पर्व के दिनों में यह मात्रा और बढ़ जाती है। इन फूलों को मंगलनाथ के पास स्थित अगरबत्ती यूनिट में भेजा जाता है, जहां इनसे धूप बत्ती, अगरबत्ती, हवन कप और अष्ट गंध तैयार की जाती है। इसके अलावा, मंदिर के अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए हर मंगलवार और शुक्रवार को दक्षिण भारतीय भोजन भी प्रसाद के रूप में परोसा जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उज्जैन में महाकाल भस्म आरती का समय क्या है?

सावन महीने में हर सोमवार को भगवान महाकाल को रात 2:30 बजे जगाया जाता है, जबकि मंगलवार से रविवार तक भस्म आरती तड़के 3 बजे शुरू होती है।

भस्म आरती में कौन लोग शामिल हो सकते हैं और इसके क्या नियम हैं?

भस्म आरती केवल 16 अधिकृत पुजारी या उनके परिवार के सदस्य कर सकते हैं। इसमें शामिल होने के लिए पुरुषों को सोला धोती और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।

महाकाल मंदिर में जलाभिषेक के लिए पानी की क्या विशेषता है?

ज्योतिर्लिंग के क्षरण को रोकने के लिए मंदिर परिसर स्थित कोटि तीर्थ कुंड के जल का उपयोग किया जाता है, जिसकी pH वैल्यू 7 से 9 के बीच अल्कलाइन होती है।

महाकाल मंदिर में अर्पित फूलों का क्या किया जाता है?

मंदिर में रोजाना चढ़ाए जाने वाले चार टन से अधिक फूलों को मंगलनाथ के पास स्थित यूनिट में भेजा जाता है, जहां उनसे धूप बत्ती, अगरबत्ती और हवन कप बनाए जाते हैं।