Wednesday, 4 November 2026
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NCTE की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा: एक ही शिक्षक 90 से ज्यादा संस्थानों में रजिस्टर्ड, पैन कार्ड वेरिफिकेशन से खुला राज

संक्षेप में

नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की जांच में सामने आया है कि पैन कार्ड वेरिफिकेशन के दौरान एक शिक्षक 90 से अधिक संस्थानों में रजिस्टर्ड पाया गया है। कागजी कॉलेजों और डमी फैकल्टी पर नकेल कसने के लिए काउंसिल ने परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PAR) की प्रक्रिया अनिवार्य कर दी है और रिपोर्ट न देने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द की जाएगी।

मुख्य बातें

  • पैन कार्ड वेरिफिकेशन में एक शिक्षक 90 से ज्यादा संस्थानों में रजिस्टर्ड पाया गया
  • लगभग 13 हजार टीचिंग संस्थानों ने अपना डेटा जमा किया है
  • सुप्रीम कोर्ट ने काउंसिल को PAR मांगने का अधिकार दिया है
  • रिपोर्ट जमा न करने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द होगी
राज्य समाचार
NCTE की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा: एक ही शिक्षक 90 से ज्यादा संस्थानों में रजिस्टर्ड, पैन कार्ड वेरिफिकेशन से खुला राज

नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने शिक्षक शिक्षा संस्थानों में चल रहे फर्जीवाड़े पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पैन कार्ड के शुरुआती वेरिफिकेशन में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शिक्षक 90 से अधिक शिक्षण संस्थानों में रजिस्टर्ड पाया गया है। कागजों पर चल रहे इन संस्थानों और डमी फैकल्टी की पहचान के लिए अब काउंसिल ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।

PAR के जरिए होगी शिक्षकों और इंफ्रास्ट्रक्चर की पड़ताल

कागजी कॉलेजों और फर्जी छात्रों पर लगाम लगाने के लिए काउंसिल ने परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PAR) का नियम लागू किया है। इसी व्यवस्था के तहत शिक्षकों के पैन कार्ड का मिलान किया गया, जिसके बाद एक ही नाम कई जगह दर्ज होने का यह मामला उजागर हुआ। शुरुआती आंकलन के मुताबिक, कई फैकल्टी मेंबर ऐसे हैं जो एक साथ 50, 60 या 90 से ज्यादा संस्थानों की सूची में बतौर शिक्षक दर्ज हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, ये फैकल्टी इन तमाम जगहों पर पढ़ाने नहीं जाती हैं, बल्कि ये सिर्फ डमी टीचर्स के तौर पर कागजों में जुड़े हुए हैं। इसके एवज में इन शिक्षकों को तय रकम मिलती है और संस्थान नियमों को ताक पर रखकर अपनी मान्यता बचाए रखते हैं। इस तरह के तमाम मामलों का अब विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सख्त हुई काउंसिल

मान्यता प्राप्त सभी शिक्षक शिक्षा संस्थानों के लिए ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सालाना PAR जमा करना अनिवार्य किया गया था। इस प्रक्रिया के तहत लगभग 13 हजार संस्थानों ने अपना डेटा सौंप दिया था, हालांकि कुछ संस्थान इसके खिलाफ अदालत चले गए थे।

सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी विवाद पर बड़ा फैसला देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें काउंसिल द्वारा संस्थानों से अप्रेजल रिपोर्ट मांगने के नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया था। इसके बाद 30 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित संस्थानों को रिपोर्ट जमा करने का एक और मौका देने के निर्देश दिए थे।

रिपोर्ट न देने वाले संस्थानों पर रद्द होगी मान्यता

काउंसिल को डमी शिक्षकों और फर्जी प्रवेश को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद मौजूदा नियमों के तहत यह अप्रेजल फॉर्मूला जमीन पर उतारा गया। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि क्लासरूम टीचिंग की गुणवत्ता सुधारने के लिए योग्य शिक्षकों का होना अनिवार्य है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि कई कॉलेजों में बिना किसी बुनियादी ढांचे और फैकल्टी के केवल छात्रों के फर्जी रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं।

जांच में जिन संस्थानों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर या शिक्षक कम मिलेंगे, उन्हें कमियां दूर करने के सख्त निर्देश दिए जाएंगे। वहीं, जो संस्थान निर्धारित समय सीमा में अपनी परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट जमा नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

NCTE की जांच में क्या बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है?

पैन कार्ड के शुरुआती वेरिफिकेशन में सामने आया है कि एक ही शिक्षक 90 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों में रजिस्टर्ड है, जो कि असल में डमी फैकल्टी के रूप में जुड़े हुए हैं।

डमी टीचर्स और फर्जी संस्थानों की पहचान के लिए किस नियम का इस्तेमाल किया जा रहा है?

काउंसिल ने परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PAR) का नियम लागू किया है, जिसके तहत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संस्थानों को सालाना रिपोर्ट जमा करनी होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने PAR को लेकर क्या फैसला दिया है?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि काउंसिल को शिक्षक शिक्षा संस्थानों से सालाना परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट मांगने का पूरा कानूनी अधिकार है।

अप्रेजल रिपोर्ट जमा न करने वाले संस्थानों पर क्या कार्रवाई होगी?

जो संस्थान अपनी परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट जमा नहीं करेंगे, काउंसिल उनकी मान्यता को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।