Tuesday, 3 November 2026
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NEET-UG 2026: ओएमआर शीट में गड़बड़ी का दावा करने वाले याचिकाकर्ता पर 1 लाख का जुर्माना, कर्नाटक HC का फैसला

संक्षेप में

NEET-UG री-एग्जाम के नतीजों के बाद ओएमआर शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने पाया कि स्कैन की गई और मूल ओएमआर शीट में कोई अंतर नहीं था, और एनटीए ने साफ किया है कि मूल्यांकन केवल मूल दस्तावेजों पर आधारित होता है।

मुख्य बातें

  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने ओएमआर याचिका खारिज कर याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
  • स्कैन की गई OMR और ओरिजिनल OMR में कोई अंतर नहीं पाया गया।
  • एनटीए के खिलाफ देश भर के विभिन्न हाईकोर्ट में 100 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल हैं।
  • एनटीए ने छात्रों को AI की मदद से ओएमआर शीट एडिट न करने की चेतावनी दी है।
राज्य समाचार
NEET-UG 2026: ओएमआर शीट में गड़बड़ी का दावा करने वाले याचिकाकर्ता पर 1 लाख का जुर्माना, कर्नाटक HC का फैसला

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के नतीजों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में 100 से अधिक याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इसी कड़ी में कर्नाटक हाईकोर्ट ने ओएमआर आंसर शीट में हेरफेर का आरोप लगाने वाली एक याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया है।

अदालत की यह कार्रवाई तब सामने आई जब स्कैन की गई कॉपी और मूल ओएमआर शीट के मिलान में कोई अंतर नहीं पाया गया।

मूल ओएमआर से मिलान में सही पाया गया मूल्यांकन

सुनवाई के दौरान एनटीए ने अदालत के समक्ष मूल आंसर शीट पेश की। एजेंसी की ओर से स्पष्ट किया गया कि मूल्यांकन केवल ओरिजिनल ओएमआर शीट के आधार पर ही किया जाता है और पूरी प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों से किसी तरह की छेड़छाड़ की संभावना नहीं होती है।

स्कैन की गई कॉपी और मूल रिकॉर्ड में समानता मिलने पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के मामलों से अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों में चल रहे ऐसे कई मामलों में अब तक एनटीए के पक्ष में राहत भरे आदेश आए हैं।

एआई से ओएमआर एडिट करने को लेकर एनटीए की चेतावनी

री-एग्जाम के परिणाम घोषित होने के बाद सोशल मीडिया पर कई स्कैन आंसर शीट वायरल हुई थीं, जिनमें नंबरों में गड़बड़ी के दावे किए गए थे। कई छात्रों ने शिकायत की थी कि उन्हें मिली स्कैन कॉपी के अनुसार उनके अंक अधिक होने चाहिए थे, जबकि परिणाम में स्कोर काफी कम रहा।

इस स्थिति को देखते हुए एनटीए ने विद्यार्थियों को आगाह किया है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद से ओएमआर शीट को एडिट करने या बदलने का प्रयास न करें। एजेंसी के पास सभी परीक्षार्थियों की मूल आंसर शीट सुरक्षित रहती है, जिससे किसी भी डिजिटल छेड़छाड़ का तुरंत मिलान कर लिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

NEET-UG ओएमआर शीट मामले में कोर्ट ने क्या कार्रवाई की है?

कर्नाटक हाईकोर्ट ने ओएमआर आंसर शीट में गड़बड़ी का झूठा आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और याचिका खारिज कर दी है।

एनटीए ने ओएमआर शीट को लेकर छात्रों को क्या सलाह दी है?

एनटीए ने छात्रों को चेतावनी दी है कि वे AI की मदद से ओएमआर शीट को एडिट न करें क्योंकि मूल आंसर शीट एजेंसी के पास सुरक्षित रहती है।

स्कैन और मूल ओएमआर शीट की जांच में क्या सामने आया?

जांच और अदालत में पेश किए गए रिकॉर्ड के मुताबिक, स्कैन की गई OMR शीट और ओरिजिनल OMR में कोई अंतर नहीं पाया गया है।

एनटीए के खिलाफ कुल कितनी याचिकाएं दाखिल हुई हैं?

NEET-UG री-एग्जाम के परिणाम आने के बाद देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में एनटीए के खिलाफ 100 से अधिक याचिकाएं दाखिल की गई हैं।