Friday, 25 September 2026
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नीमच मेडिकल कॉलेज: निराश्रित मरीज के टूटे पैर का सफल ऑपरेशन, सामाजिक सहयोग से मिला नया जीवन

संक्षेप में

नीमच के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं जिला चिकित्सालय के अस्थिरोग विभाग ने आर्थिक रूप से कमजोर 35 वर्षीय निराश्रित मरीज लालाराम के बाएं पैर के गंभीर ओपन फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन किया है। दस्तावेजों और पैसों के अभाव के बावजूद सामाजिक कार्यकर्ता के सहयोग से इम्प्लांट की व्यवस्था कर डॉक्टरों ने यह जटिल सर्जरी पूरी की।

मुख्य बातें

  • 35 वर्षीय निराश्रित मरीज लालाराम के बाएं पैर की टिबिया और फीबुला का सफल ऑपरेशन हुआ।
  • 8 जून को ऊंचाई से गिरने के कारण मरीज को गंभीर ओपन फ्रैक्चर हुआ था।
  • 8 सितंबर को अत्याधुनिक मॉड्यूलर ओटी में ढाई घंटे तक चली सर्जरी।
  • सामाजिक कार्यकर्ता निखिलेश वर्मा के आर्थिक सहयोग से इम्प्लांट की व्यवस्था हुई।
  • 23 सितंबर को साढ़े तीन महीने बाद मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया।
मध्य प्रदेश
नीमच मेडिकल कॉलेज: निराश्रित मरीज के टूटे पैर का सफल ऑपरेशन, सामाजिक सहयोग से मिला नया जीवन

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं जिला चिकित्सालय नीमच के अस्थिरोग विभाग ने एक निराश्रित और आर्थिक रूप से कमजोर मरीज का सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया है। 35 वर्षीय लालाराम के बाएं पैर की टिबिया और फीबुला हड्डियों में गंभीर ओपन फ्रैक्चर था। इलाज के लिए पैसे और आयुष्मान योजना के दस्तावेज न होने के कारण उनके सामने संकट खड़ा हो गया था, लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों और सामाजिक सहयोग से जटिल सर्जरी को अंजाम दिया गया।

मरीज लालाराम 8 जून को करीब 8 से 10 फीट की ऊंचाई से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मनासा में प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जिला अस्पताल नीमच रेफर किया गया था, जहां अस्थिरोग विभागाध्यक्ष असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पुनीत कुमार आचार्य की देखरेख में उनका इलाज शुरू हुआ। ओपन फ्रैक्चर होने के कारण संक्रमण का खतरा अधिक था, इसलिए पहले घाव को ठीक करने पर जोर दिया गया। नियमित ड्रेसिंग, एंटीबायोटिक और कई बार डिब्राइडमेंट की प्रक्रिया के बाद करीब तीन महीने में घाव संतोषजनक स्थिति में आया।

मॉड्यूलर ओटी में हुई ढाई घंटे की सर्जरी

घाव भरने के बाद 8 सितंबर को अत्याधुनिक मॉड्यूलर ओटी में लालाराम की सर्जरी की गई। करीब ढाई घंटे चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों ने इंटरलॉकिंग इंट्रामेडुलरी नेलिंग सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।

"यह मामला चिकित्सकीय सेवा के साथ सामाजिक सहयोग से आर्थिक रूप से असहाय मरीज को उपचार उपलब्ध कराने का एक बड़ा उदाहरण है।" — डॉ. पुनीत कुमार आचार्य, अस्थिरोग विभागाध्यक्ष

इस सर्जरी में डॉ. पुनीत कुमार आचार्य के साथ डॉ. हिमांशु सुमन और डॉ. अतुल सोलंकी ने अपनी सेवाएं दीं। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. अवि शर्मा ने संभाली, जबकि ओटी और नर्सिंग स्टाफ ने भी पूरा सहयोग किया। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आदित्य बैराड़ और सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र पाटिल ने इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक मार्गदर्शन दिया।

सामाजिक सहयोग से संभव हुआ इम्प्लांट

ऑपरेशन के लिए जरूरी इम्प्लांट का खर्च उठाने में लालाराम असमर्थ थे और दस्तावेजों के अभाव में किसी सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में डॉ. पुनीत कुमार आचार्य ने व्यक्तिगत प्रयास करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता निखिलेश वर्मा से संपर्क किया। उनके आर्थिक सहयोग से इम्प्लांट की व्यवस्था हो सकी, जिससे मरीज का समय पर इलाज संभव हुआ।

अब अपने पैरों पर चल रहे हैं लालाराम

सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी तेजी से हुई। टांके हटाए जाने के बाद अब लालाराम अपने बाएं पैर पर पूरा वजन डालकर आसानी से चल पा रहे हैं। करीब साढ़े तीन महीने के लंबे अस्पताल प्रवास के बाद 23 सितंबर को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, नीमच मेडिकल कॉलेज में अब ट्रॉमा और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट जैसी जटिल सर्जरी के लिए सुविधाएं लगातार बढ़ाई जा रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नीमच मेडिकल कॉलेज में किस मरीज का सफल ऑपरेशन किया गया है?

नीमच मेडिकल कॉलेज में 35 वर्षीय निराश्रित और आर्थिक रूप से कमजोर मरीज लालाराम के बाएं पैर की टिबिया और फीबुला के गंभीर ओपन फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन किया गया है।

ऑपरेशन के लिए इम्प्लांट की व्यवस्था कैसे की गई?

मरीज के पास पैसे और आयुष्मान कार्ड के दस्तावेज न होने के कारण अस्थिरोग विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत कुमार आचार्य ने सामाजिक कार्यकर्ता निखिलेश वर्मा से संपर्क किया, जिन्होंने इम्प्लांट के लिए आर्थिक सहयोग दिया।

यह सर्जरी कब और किसने की?

यह सर्जरी 8 सितंबर को अस्थिरोग विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत कुमार आचार्य, डॉ. हिमांशु सुमन, डॉ. अतुल सोलंकी और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अवि शर्मा की टीम ने अत्याधुनिक मॉड्यूलर ओटी में की।

मरीज को अस्पताल से कब छुट्टी मिली?

ऑपरेशन के बाद रिकवरी होने पर 23 सितंबर को करीब साढ़े तीन महीने बाद लालाराम को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, अब वे अपने पैर पर पूरा भार देकर चल पा रहे हैं।