दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के केंद्र सरकार पर दिए गए तीखे बयानों को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में बहस छिड़ गई है। शाह के हालिया वीडियो में खुद को 'दिमागी नक्सल' बताने पर अभिनेता पुनीत इस्सर ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस्सर ने कहा है कि यदि शाह को मौजूदा सरकार की नीतियां पसंद नहीं हैं, तो वे चुनावी मैदान में उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करें।
मंगलवार को सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने केंद्र सरकार पर शिक्षा संस्थानों को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया था। इसी बयान के बाद से राजनीतिक और फिल्मी गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
पुनीत इस्सर का पलटवार- 'चुनिंदा मुद्दों पर ही क्यों बोलते हैं?'
नसीरुद्दीन शाह के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए पुनीत इस्सर ने उनके अभिनय कौशल और सीनियरटी का सम्मान तो किया, लेकिन उनकी वैचारिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इस्सर ने कहा कि शाह जैसे वरिष्ठ कलाकारों को किसी एक पक्ष तक सीमित न रहकर देश के तमाम मुद्दों पर निष्पक्ष राय रखनी चाहिए।
पुनीत इस्सर ने कहा- "जब देश में दोषी ठहराए गए अपराधियों और जेल में बंद आतंकियों की रिहाई की मांग होती है, तब एक खास वर्ग और जेएनयू से जुड़े लोग उनके पक्ष में खड़े नजर आते हैं। यदि आप ऐसे तत्वों का समर्थन करेंगे, तो एक भारतीय होने के नाते यह स्वीकार्य नहीं है।"
'सरकार जनता द्वारा चुनी गई है'
शाह को अपनी बात रखने का अधिकार होने की बात स्वीकार करते हुए इस्सर ने राजनीतिक तरीके से विरोध जताने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कोई मनमाने तरीके से नहीं आई है, बल्कि इसे देश की जनता ने चुनकर भेजा है। यदि किसी को व्यवस्था से नाराजगी है, तो उन्हें राजनीति में आकर चुनाव लड़ना चाहिए।
वहीं, इस पूरे विवाद पर अभिनेता और पूर्व सांसद परेश रावल ने भी प्रतिक्रिया दी है। रावल ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह की अपनी स्वतंत्र राय है और हर नागरिक को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का पूरा अधिकार है, इसलिए वे इस पर कुछ नहीं कहना चाहते।
वीडियो में शाह ने सरकार से पूछे थे तीखे सवाल
नसीरुद्दीन शाह ने मंगलवार को अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि चौकीदार जैसे शब्दों से उन्हें 'एंटी-नेशनल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे उपनाम दिए गए हैं, लेकिन वे गर्व से खुद को 'दिमागी नक्सल' मानते हैं।
शाह ने वीडियो में सवाल उठाया था कि देश के नौजवानों की हिम्मत तोड़ने और शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए सरकार और कितनी हद तक जाएगी। उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों पर लोकतंत्र को खतरे में डालने का भी आरोप लगाया था, जिसके बाद से यह बयान लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
