ऑनलाइन फाइनेंशियल मार्केटप्लेस पैसाबाजार में अब 86% नया कोड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल तैयार कर रहे हैं। इसके बावजूद कंपनी की इंजीनियरिंग वर्कफोर्स में कटौती करने की कोई योजना नहीं है। कंपनी के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) मुकेश शर्मा ने बताया कि AI के इस्तेमाल से प्रोडक्ट डिलीवरी की रफ्तार काफी बढ़ गई है, जिसके चलते कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी टीम को घटाने के बजाय और मजबूत कर रही है।

उत्पादन क्षमता में पांच गुना इजाफा

मुकेश शर्मा के मुताबिक, कंपनी की इंजीनियरिंग टीम के सभी सदस्य Claude या Cursor जैसे एन्टरप्राइज AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बदलाव का असर सॉफ्टवेयर प्रोडक्शन की फ्रीक्वेंसी पर साफ दिखाई दे रहा है।

पहले जहां महीने में प्रोडक्शन पर औसतन 30 बिल्ड्स किए जाते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 150 से ज्यादा हो गई है। इसके अलावा, कोड रिव्यू, क्वालिटी एश्योरेंस और टेस्ट केस जनरेट करने जैसे कामों में भी AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

छंटनी क्यों नहीं हो रही?

AI के जरिए कोडिंग बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या कम न होने की वजह बताते हुए CTO ने कहा कि कंपनी के पास पाइपलाइन में ऐसे कई प्रोडक्ट्स हैं जिन्हें ग्राहक मांग के मुताबिक तैयार करना है।

मुकेश शर्मा ने बताया, "अगर मेरे पास 10 से 12 प्रोडक्ट्स पाइपलाइन में हैं जिन्हें मैं बनाना चाहता हूं, तो मैं अंतहीन रूप से लोगों को काम पर नहीं रख सकता क्योंकि बजट की सीमाएं हैं। AI की मदद से हम उन प्रोडक्ट्स को तेजी से शिप कर पा रहे हैं।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन संगठनों में नए प्रोजेक्ट्स पर काम बंद हो चुका है और वे केवल पुराने सिस्टम को मेंटेन कर रहे हैं, वहां कर्मचारियों की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन जहां लगातार नए प्रोजेक्ट्स और विकास का काम चल रहा है, वहां डेवलपर्स और AI दोनों की आवश्यकता बनी रहेगी।

बदल रही है इंजीनियर्स की भूमिका

AI के आने से डेवलपर्स का काम करने का तरीका बदल गया है। अब इंजीनियर्स की भूमिका कोडिंग करने भर तक सीमित नहीं रही है, बल्कि उन्हें यह तय करना होता है कि किसी खास टास्क के लिए कौन सा AI मॉडल सबसे उपयुक्त रहेगा।

मुकेश शर्मा ने बताया कि जटिल आर्किटेक्चरल बदलावों के लिए सीनियर इंजीनियर ज्यादा सक्षम रीजनिंग मॉडल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि छोटे हिस्सों के लिए सस्ते और छोटे मॉडलों का उपयोग किया जाता है।

हालांकि, उन्होंने जूनियर इंजीनियर्स के सामने आने वाली चुनौती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो फ्रेशर्स सीधे AI कोडिंग असिस्टेंट्स पर निर्भर हो जाते हैं, वे धीरे-धीरे कोड को खुद समझने और उसकी बुनियादी बारीकियों को सीखने की अपनी प्राकृतिक क्षमता खो सकते हैं।

कोर सिस्टम और रेवेन्यू में AI की हिस्सेदारी

पैसाबाजार अपने कोर सिस्टम्स में भी AI जनरेटेड कोड का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन इसके दायरे को सख्ती से नियंत्रित किया गया है। ऑटोमेटेड स्पीच रिकग्निशन (ASR) जैसी बेहद संवेदनशील तकनीक को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है और इसे किसी भी बाहरी AI टूल के दायरे से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा, AI द्वारा तैयार किया गया कोई भी कोड सीधे प्रोडक्शन में नहीं जाता है। डेवलपर द्वारा रिव्यू और कमिट करने के बाद वह कोड कंपनी की ऑटोमेटेड टेस्टिंग, सिक्योरिटी और क्वालिटी एश्योरेंस प्रक्रियाओं से गुजरता है।

कोडिंग के अलावा, मशीन-लर्निंग मॉडल अब पैसाबाजार के कुल रेवेन्यू में कम से कम 50% हिस्सेदारी रखते हैं। कंपनी की 'चांसेस ऑफ अप्रूवल' पहल इसके सबसे बड़े उदाहरणों में से एक है, जो क्रेडिट डेटा और लेंडर की नीतियों के आधार पर ग्राहकों को लोन की रैंकिंग सुझाती है। इसके साथ ही, कंपनी अपने 3,000 एजेंटों वाले कॉल सेंटर में हर दिन आने वाले 100 से 120 जीबी कॉल्स का विश्लेषण करने के लिए इन-हाउस स्पीच मॉडल का उपयोग कर रही है, जिससे अब लगभग 100% कॉल ऑडिट नियर-रियल-टाइम में संभव हो पा रहा है।