मध्य प्रदेश के पन्ना में केन-बेतवा लिंक और रुंज-मझगांय परियोजना के विस्थापित परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा न मिलने पर सियासी पारा चढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अगुवाई में प्रभावित परिवारों ने मंगलवार को पन्ना कलेक्ट्रेट का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुआवजा वितरण में आदिवासियों और पात्र परिवारों के साथ पक्षपात किया जा रहा है।
कलेक्ट्रेट परिसर में उमंग सिंघार ने कहा कि कागजों में भले ही विस्थापन और पुनर्वास की योजनाएं बड़ी दिखती हों, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इसके उलट है। कई ऐसे परिवार हैं जिनके घर और ज़मीनें परियोजनाओं में जा चुकी हैं, लेकिन तमाम कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी उन्हें एक फूटी कौड़ी नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खास लोगों को ही मुआवजे का लाभ पहुंचाया गया है, जबकि असल हकदार आज भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
जांच और निष्पक्षता की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि विस्थापितों की शिकायतों पर सुनवाई तक नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की कि पूरे मुआवजा वितरण की प्रक्रिया की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि पात्र परिवारों के नाम सूचियों से कैसे गायब हुए।
प्रदर्शन के दौरान अपर कलेक्टर मधुवतराव धुर्वे ने मौके पर पहुंचकर विस्थापितों का ज्ञापन लिया और प्रशासनिक स्तर पर जांच का भरोसा दिया। हालांकि, प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से मौखिक आश्वासन सुनते आ रहे हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
विधानसभा सत्र में गूंजेगा मुद्दा
कलेक्ट्रेट प्रदर्शन के बाद उमंग सिंघार ने साफ कर दिया कि यह लड़ाई सिर्फ कलेक्ट्रेट तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के हक और उनके मुआवजे का यह मामला आगामी विधानसभा सत्र के दौरान जोर-शोर से उठाया जाएगा, ताकि सरकार सदन में जवाबदेह बने।
विस्थापित परिवारों का कहना है कि जब तक उन्हें उनकी ज़मीन और आजीविका का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
