तीर्थराज पुष्कर के पवित्र ब्रह्मा सरोवर पर शनिवार को श्राद्ध पक्ष की पूर्णिमा के साथ ही पितृपक्ष के अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने सरोवर के विभिन्न घाटों पर स्नान कर अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुष्कर में श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेंगे श्राद्ध कर्म
पद्म पुराण के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक चलने वाले श्राद्ध पक्ष का पुष्कर में विशेष महत्व है। इस बार पूर्णिमा स्नान के साथ शुरू हुए ये अनुष्ठान 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या तक चलेंगे।
सरोवर के ब्रह्म घाट और अन्य प्रमुख घाटों पर सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था। तीर्थ पुरोहितों के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। तर्पण के बाद लोगों ने जरूरतमंदों को दान-पुण्य किया और अपने परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की।
पौराणिक परंपरा और धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, तीर्थराज पुष्कर को सभी तीर्थों का गुरु माना जाता है। मान्यता है कि सतयुग में भगवान राम और द्वापर युग में पांडवों ने भी अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए पुष्कर सरोवर पर श्राद्ध और पिंडदान किया था।
स्थानीय तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक, इस पवित्र तीर्थ पर पितृ तर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर साल पुष्कर पहुंचते हैं।
घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था
श्राद्ध पक्ष के इन 16 दिनों के दौरान पुष्कर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने घाटों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। सरोवर के गहरे पानी में श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए गोताखोरों और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है, ताकि अनुष्ठान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें।
