राजस्थान में अटके पड़े पंचायत और शहरी निकाय चुनावों का रास्ता साफ हो गया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए रोडमैप को स्वीकार करते हुए 15 नवंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा में कोताही बरतने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

15 नवंबर तक पूरी होगी प्रक्रिया

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर चुनाव संपन्न कराने की समयसीमा बताई है। इसके तहत, पहले शहरी निकायों और उसके बाद पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। प्रदेश की करीब 14,000 ग्राम पंचायतों और 300 से अधिक शहरी निकायों में चुनाव होने हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी है कि दी गई नई डेडलाइन के बाद चुनाव के लिए अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

चुनाव की महत्वपूर्ण टाइमलाइन

हाईकोर्ट में पेश रोडमैप के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी:

  • 5 अगस्त 2026 तक: ओबीसी आयोग द्वारा राजनीतिक आरक्षण का सर्वे डेटा और फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
  • 15 अगस्त 2026 तक: वार्डों का पुनर्गठन और आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया (सीटों का वर्गीकरण) पूरी कर ली जाएगी।
  • 15 अगस्त के बाद: आरक्षण की अधिसूचना जारी कर आपत्तियां मांगी जाएंगी। इसके तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग मुख्य चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा करेगा।

चार चरणों में पंचायत, दो में निकाय चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग के प्रारंभिक प्रस्ताव के मुताबिक, बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण मतदान के लिए पंचायती राज चुनाव लगभग चार चरणों में और शहरी निकाय चुनाव दो चरणों में संपन्न कराए जा सकते हैं। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह भी कोर्ट में मौजूद रहे। महाधिवक्ता ने कोर्ट में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की प्रतिबद्धता जताई है।

चुनावी सरगर्मी तेज

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश भर में प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला निर्वाचन अधिकारियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और मतदान केंद्रों के चिन्हीकरण का काम शुरू कर दिया है। सरकार के लिए 15 नवंबर तक चुनाव संपन्न कराना संवैधानिक बाध्यता है, जिससे अगस्त के दूसरे पखवाड़े से ही प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवन्दा की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश पारित किया है।