राजस्थान सरकार की 'कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना' में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव प्रस्तावित किया गया है। अब उच्च शिक्षा विभाग पारंपरिक टेंडर प्रक्रिया के जरिए एक साथ बड़ी संख्या में स्कूटियों की खरीद और वितरण नहीं करेगा। इसके बजाय, पात्र छात्राओं को ई-वाउचर या डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में दोनों विकल्पों के प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेज दिए हैं, जिनकी मंजूरी मिलते ही नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।  इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल टेंडर, ट्रांसपोर्टेशन और भंडारण में लगने वाला लंबा समय और प्रक्रियागत देरी खत्म होगी, बल्कि छात्राओं को वितरण के लिए महीनों इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। ई-वाउचर व्यवस्था के तहत सरकार द्वारा जारी राशि का भुगतान केवल अधिकृत डीलर को होगा, जिससे इसका इस्तेमाल सिर्फ स्कूटी खरीदने के लिए ही किया जा सकेगा। वहीं, DBT व्यवस्था में तय राशि सीधे छात्रा के प्रमाणित बैंक खाते में भेजी जाएगी। इस ऐतिहासिक फैसले का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य की मेधावी छात्राओं को अपनी जरूरत, पसंद और मनपसंद मॉडल/ब्रांड की स्कूटी चुनने की पूरी आजादी मिलेगी। वही मौजूदा सत्र के लिए वरीयता सूची पहले ही जारी की जा चुकी है और वित्त विभाग की हरी झंडी मिलते ही नई प्रक्रिया के तहत लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।