Monday, 28 September 2026
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रूस-यूक्रेन युद्ध में रोबोट सैनिकों की एंट्री: यूक्रेन ने सुसाइड रोबोट से किए हमले, 3 हजार रूसी सैनिकों के मारे जाने का दावा

संक्षेप में

रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन ने पहली बार सुसाइड जमीनी रोबोट और ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। 'ऑपरेशन विवाल्डी' के तहत इन रोबोट्स की मदद से रूस के करीब 3,000 सैनिकों को मार गिराया गया और पूर्वी डोनेट्स्क में 5 गांवों पर कब्जा पुनः प्राप्त किया गया।

मुख्य बातें

  • यूक्रेन ने पहली बार सुसाइड जमीनी रोबोट से रूसी सेना पर हमला किया।
  • ऑपरेशन विवाल्डी के तहत रूस के करीब 3,000 सैनिक मारे गए।
  • पूर्वी डोनेट्स्क में 5 गांवों और 3 बस्तियों पर यूक्रेन ने दोबारा नियंत्रण हासिल किया।
  • यह अभियान मई से सितंबर 2024 के आखिरी सप्ताह तक चला, जिसमें रोबोट ने 15,700 से अधिक मिशन पूरे किए।
  • पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने 26 सितंबर को
देश विदेश
रूस-यूक्रेन युद्ध में रोबोट सैनिकों की एंट्री: यूक्रेन ने सुसाइड रोबोट से किए हमले, 3 हजार रूसी सैनिकों के मारे जाने का दावा

रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तकनीक का दायरा इंसानी हथियारों से आगे बढ़कर मानवरहित मशीनों तक पहुंच गया है। यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना पर हमला करने का दावा किया है। यूक्रेनी सेना के मुताबिक, इस नई रणनीति से न सिर्फ भारी तबाही मचाई गई है, बल्कि फ्रंटलाइन पर सैनिकों की जान का जोखिम भी काफी हद तक कम हुआ है।

यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के अनुसार, 'ऑपरेशन विवाल्डी' के तहत रोबोट और ड्रोन की मदद से रूस के करीब 3,000 सैनिकों को मार गिराया गया है। यह सैन्य अभियान मई में शुरू हुआ था और सितंबर के आखिरी सप्ताह में जाकर पूरा हुआ। यूक्रेनी सेना ने गुरुवार को इस ऑपरेशन से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए।

कैसे अंजाम दिया गया 'ऑपरेशन विवाल्डी'

इस पूरे ऑपरेशन में चार पहियों वाले ऐसे मानवरहित रोबोट का इस्तेमाल किया गया, जिनमें भारी मात्रा में विस्फोटक भरे हुए थे। बड़े आकार के ड्रोन इन रोबोट्स को रूसी सेना की रक्षा पंक्ति के 14.5 किलोमीटर अंदर तक ले जाकर छोड़ते थे। इसके बाद ये रोबोट जमीन पर आगे बढ़ते हुए सीधे रूसी सैनिकों के ठिकानों तक पहुंचते थे और विस्फोट को अंजाम देते थे।

इन रोबोट्स में हाई-डेफिनिशन कैमरे लगे थे, जिनकी मदद से ऑपरेटर दूर बैठकर आसपास के हर मूवमेंट पर नजर रख रहा था। यूक्रेनी सेना ने इन कैमरों की फीड के आधार पर रूसी सेना के कमांड सेंटरों, बंकरों, हथियारों के गोदामों और सामरिक रूप से अहम नदी पार करने के रास्तों को निशाना बनाया। सेना का मुख्य उद्देश्य अपने सैनिकों को सीधे आमने-सामने की गोलीबारी में झोंके बिना दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाना था।

थर्ड आर्मी कॉर्प्स के कमांडर जनरल आंद्री बिलेत्स्की ने इस तकनीक पर बात करते हुए कहा कि यूक्रेन दुनिया में पहली बार ड्रोन के जरिए रोबोट को सीधे दुश्मन के इलाके में उतारकर इस तरह के हमले कर रहा है। इस पूरे अभियान के दौरान इन रोबोट्स ने कुल मिलाकर 15,700 से ज्यादा मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए।

पूर्वी डोनेट्स्क में 5 गांवों पर कब्जा

इस तकनीकी आक्रामकता के बल पर यूक्रेनी सेना ने जमीन पर भी बड़ा फायदा हासिल किया है। पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में चलाए गए इस अभियान के दौरान सेना ने 5 गांवों और 3 बस्तियों पर दोबारा अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। युद्ध के मौजूदा दौर में इसे यूक्रेन की एक बड़ी सामरिक सफलता माना जा रहा है।

सुसाइड जमीनी रोबोट आकार में छोटे और पहियों वाले वाहन होते हैं, जिन्हें रिमोट के जरिए कंट्रोल किया जाता है। हालांकि ये पूरी तरह ऑटोनॉमस नहीं होते और इनमें हमले या मूवमेंट का फैसला लेने के लिए इंसानी ऑपरेटर की जरूरत होती है। इन मशीनों के इस्तेमाल से बारूदी सुरंगों और सीधी गोलीबारी के बीच सैनिकों के आगे बढ़ने का जोखिम टल जाता है।

भविष्य के लिए 'आर्मी ऑफ रोबोट्स' प्रोजेक्ट

मैदान पर मिली इस सफलता के बाद यूक्रेन अब युद्ध के लिए एक पूरी रोबोट सेना तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने 26 सितंबर को ‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ प्रोजेक्ट का आधिकारिक ऐलान किया था। इस प्रोजेक्ट का मकसद युद्ध के सबसे जोखिम भरे मोर्चों पर इंसानों की जगह मशीनों को उतारना है।

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ह्यूमनॉइड रोबोट्स यानी इंसानी शक्ल जैसी मशीनें तैयार की जाएंगी, जो युद्ध के मैदान में मशीन गन में गोलियां लोड करने, हथियारों की बैटरी बदलने और सेंसर दुरुस्त करने जैसे काम करेंगी। इससे सैनिकों को साजो-सामान के रखरखाव के लिए सीधे मोर्चे पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस पूरे प्रोजेक्ट में जमीनी मानवरहित वाहन (UGV), उन्नत ड्रोन, कम लागत वाले इंटरसेप्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस हमलावर सिस्टम शामिल हैं। यूक्रेन इन हथियारों के विकास के लिए पश्चिमी देशों के तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और निवेशकों से लगातार सहयोग जुटा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यूक्रेन ने रूस के खिलाफ किस नई तकनीक का इस्तेमाल किया है?

यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट और ड्रोन का इस्तेमाल कर रूसी ठिकानों पर हमले किए हैं।

ऑपरेशन विवाल्डी में यूक्रेनी सेना को क्या सफलता मिली?

इस ऑपरेशन के तहत रोबोट्स की मदद से रूस के करीब 3,000 सैनिकों को मार गिराया गया और डोनेट्स्क क्षेत्र में 5 गांवों व 3 बस्तियों पर नियंत्रण हासिल किया गया।

सुसाइड जमीनी रोबोट युद्ध के मैदान में कैसे काम करते हैं?

विस्फोटकों से लैस इन चार पहिया रोबोट्स को बड़े ड्रोन दुश्मन के इलाके के भीतर तक पहुंचाते हैं। इसके बाद ये जमीन पर चलकर रूसी ठिकानों तक पहुंचते हैं और कैमरे की मदद से ऑपरेटर इन्हें नियंत्रित करता है।

आर्मी ऑफ रोबोट्स प्रोजेक्ट क्या है?

यूक्रेन द्वारा शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट का मकसद युद्ध में सैनिकों की जान बचाने के लिए ह्यूमनॉइड रोबोट्स, मानवरहित वाहनों और AI से लैस हमलावर सिस्टम की एक सेना तैयार करना है।