भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला इस हफ्ते भी जारी रहा। शुक्रवार 25 सितंबर को लगातार सातवें हफ्ते लाल निशान पर बंद होने के बाद, सोमवार के कारोबार में भी बाजार भारी बिकवाली के दबाव में दिखा।
सेंसेक्स 1,124 अंक यानी 1.52% की बड़ी गिरावट के साथ 72,772 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 360 अंक या 1.56% फिसलकर 22,780 पर बंद हुआ। आज के कारोबार में बैंकिंग, FMCG और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई।
7 लाख करोड़ रुपए घटी निवेशकों की वेल्थ
बाजार में आई इस तेज बिकवाली से निवेशकों की पूंजी को बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप, जो पिछले सत्र में करीब 482 लाख करोड़ रुपए था, घटकर 475 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है। इस तरह एक ही दिन में निवेशकों के करीब 7 लाख करोड़ रुपए डूब गए।
बाजार में गिरावट की 3 मुख्य वजहें
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय बाजार में इस भारी बिकवाली के पीछे मुख्य तौर पर तीन बड़े वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं:
1. वैश्विक तनाव और सप्लाई रूट पर संकट
दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे हैं, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार है। इसके साथ ही, रूस और यूक्रेन के बीच भी संघर्ष के बढ़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
दुनिया के प्रमुख तेल सप्लाई रूट 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर जारी विवाद के कारण ब्रेंट क्रूड का भाव 105 से 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत से स्थिति सामान्य होती है, तो तेल सस्ता होगा जिससे भारत का आयात बिल घटेगा। हालांकि, तनाव जारी रहने की स्थिति में महंगाई का दबाव बढ़ने और बाजार में अस्थिरता बने रहने की आशंका है।
3. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अमेरिकी बाजार में बॉन्ड पर मिलने वाले रिटर्न में तेजी ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.11% पर पहुंच गई है, जो साल 2007 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और महंगाई के रुख से प्रभावित इस बढ़ोतरी के चलते डॉलर में निवेश अधिक आकर्षक हो गया है। इस वजह से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारत जैसे उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी बॉन्ड में निवेश कर रहे हैं।
