पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र जनरल ASSEMBLY में भारत को युद्ध की धमकी दी है। उन्होंने दावा किया कि भारत द्वारा सिंधु नदी के पानी को रोकना पाकिस्तान के खिलाफ जंग जैसी कार्रवाई माना जाएगा। इसके साथ ही शहबाज ने कश्मीर राग अलापते हुए इसे पाकिस्तान की 'गर्दन की नस' बताया और पिछले साल हुए सैन्य संघर्ष का भी जिक्र किया।
भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में तैनात फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने इस बयान का कड़ा प्रतिवाद किया। भारत ने साफ कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और पाकिस्तान को उसके अंजाम भुगतने होंगे।
सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा
शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि पिछले साल के सैन्य संघर्ष के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को एकतरफा रोक दिया है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और स्थायी मध्यस्थता अदालत ने भारत के कदमों को खारिज किया है।
मालूम हो कि अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले के बाद भारत ने सीमा पार आतंकवाद के विरोध में सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। भारत का यह रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।
'गर्दन की नस' और ट्रंप की तारीफ
शहबाज ने अपने भाषण में कश्मीर का जिक्र करते हुए पुराने बयानों को दोहराया। उन्होंने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व का हवाला देते हुए पिछले साल के संघर्ष का भी जिक्र किया। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तारीफ करते हुए कहा कि मई 2025 में दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने और युद्ध जैसी स्थिति को टालने में उनकी मध्यस्थता अहम रही। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि दक्षिण एशिया में शांति के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान अनिवार्य है।
भारत का दो टूक जवाब
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया। भारत ने साफ किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। आतंकवाद को पनाह देने वाले देश को उसकी भाषा में ही जवाब मिलेगा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद के खात्मे तक पड़ोसी देश के साथ सामान्य कूटनीतिक संबंध बहाल नहीं हो सकते।
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