सप्ताहभर के कारोबार में कीमती धातुओं के भाव में भारी नरमी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत में 13,071 रुपए की भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही घरेलू सर्राफा बाजार में एक किलो चांदी 1.94 लाख रुपए से फिसलकर 1.81 लाख रुपए पर आ गई है।
सोने की कीमतों में भी राहत मिली है। समीक्षाधीन हफ्ते में 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,576 रुपए सस्ता होकर 1.40 लाख रुपए पर पहुंच गया है, जो इससे पहले 1.41 लाख रुपए पर ट्रेड कर रहा था। इस गिरावट के साथ ही अक्टूबर महीने के शुरुआती स्तरों से तुलना करें तो सोने-चांदी के भाव काफी नीचे आ चुके हैं। एक अक्टूबर 2026 को एक किलो चांदी 2.20 लाख रुपए और 10 ग्राम सोना 1.48 लाख रुपए के स्तर पर था।
एक महीने का हिसाब और मुख्य कारण
इस पूरे महीने की चाल देखें तो चांदी में 39,485 रुपए और सोने में 8,084 रुपए की कुल गिरावट आ चुकी है। वैश्विक स्तर पर डॉलर के मजबूत होने और ऊंचे दामों पर बड़े निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने से घरेलू बाजार में भी कीमतें नीचे आई हैं।
सोना सस्ता होने के पीछे मुख्य रूप से तीन वजहें सामने आई हैं। त्योहारों से पहले कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद बड़े निवेशकों ने ऊंचे भाव पर बिकवाली कर मुनाफा कमाया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती आने से ग्लोबल मार्केट में बुलियन पर दबाव बना। वहीं, आम खरीदारों ने भी रिकॉर्ड दाम देखकर फिलहाल ज्वैलरी दुकानों से दूरी बना ली है।
चांदी में क्यों आई तेज गिरावट
चांदी की कीमतों में आई भारी सुस्ती के पीछे औद्योगिक मांग का घटना भी एक बड़ा कारण है। सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्रियों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, लेकिन वैश्विक सुस्ती के चलते उद्योगों से मांग कमजोर पड़ी है।
इसके साथ ही, शेयर और वायदा बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच बड़े ट्रेडर्स ने अचानक बिकवाली शुरू कर दी। सर्राफा बाजार का पुराना रुख रहा है कि सोना और चांदी अमूमन एक साथ चलते हैं, ऐसे में सोना टूटने के बाद चांदी में भी बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह
कमोडिटी मार्केट के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट के माहौल में निवेशकों को एकमुश्त पैसा लगाने से बचना चाहिए। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया की सलाह है कि सोने-चांदी की खरीदारी किश्तों में की जानी चाहिए। खरीदार कुछ हिस्सा अभी ले सकते हैं और बाकी खरीदारी 15 से 20 दिन के अंतराल पर करें। इसके अलावा, निवेश का मन बना रहे लोगों को अल्पकालिक यानी एक-दो महीने के बजाय 6 महीने से एक साल के नजरिए से ही बाजार में उतरना चाहिए।
