Sunday, 1 November 2026
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सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट: एक हफ्ते में 13 हजार तक सस्ती हुई चांदी, सोना भी लुढ़का

संक्षेप में

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, एक हफ्ते में चांदी 13,071 रुपए सस्ती होकर 1.81 लाख रुपए प्रति किलो और सोना 1,576 रुपए सस्ता होकर 1.40 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली इसके मुख्य कारण हैं।

मुख्य बातें

  • चांदी की कीमत में 13,071 रुपए की गिरावट आई, भाव 1.81 लाख रुपए प्रति किलो हुआ
  • 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,576 रुपए घटकर 1.40 लाख रुपए पर पहुंचा
  • इस महीने अब तक चांदी 39,485 रुपए और सोना 8,084 रुपए सस्ता हुआ है
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होने और बड़े निवेशकों की बिकवाली से गिरे दाम
  • कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने किश्तों में खरीदारी करने की सलाह दी है
देश विदेश
सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट: एक हफ्ते में 13 हजार तक सस्ती हुई चांदी, सोना भी लुढ़का

सप्ताहभर के कारोबार में कीमती धातुओं के भाव में भारी नरमी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत में 13,071 रुपए की भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही घरेलू सर्राफा बाजार में एक किलो चांदी 1.94 लाख रुपए से फिसलकर 1.81 लाख रुपए पर आ गई है।

सोने की कीमतों में भी राहत मिली है। समीक्षाधीन हफ्ते में 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,576 रुपए सस्ता होकर 1.40 लाख रुपए पर पहुंच गया है, जो इससे पहले 1.41 लाख रुपए पर ट्रेड कर रहा था। इस गिरावट के साथ ही अक्टूबर महीने के शुरुआती स्तरों से तुलना करें तो सोने-चांदी के भाव काफी नीचे आ चुके हैं। एक अक्टूबर 2026 को एक किलो चांदी 2.20 लाख रुपए और 10 ग्राम सोना 1.48 लाख रुपए के स्तर पर था।

एक महीने का हिसाब और मुख्य कारण

इस पूरे महीने की चाल देखें तो चांदी में 39,485 रुपए और सोने में 8,084 रुपए की कुल गिरावट आ चुकी है। वैश्विक स्तर पर डॉलर के मजबूत होने और ऊंचे दामों पर बड़े निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने से घरेलू बाजार में भी कीमतें नीचे आई हैं।

सोना सस्ता होने के पीछे मुख्य रूप से तीन वजहें सामने आई हैं। त्योहारों से पहले कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद बड़े निवेशकों ने ऊंचे भाव पर बिकवाली कर मुनाफा कमाया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती आने से ग्लोबल मार्केट में बुलियन पर दबाव बना। वहीं, आम खरीदारों ने भी रिकॉर्ड दाम देखकर फिलहाल ज्वैलरी दुकानों से दूरी बना ली है।

चांदी में क्यों आई तेज गिरावट

चांदी की कीमतों में आई भारी सुस्ती के पीछे औद्योगिक मांग का घटना भी एक बड़ा कारण है। सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्रियों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, लेकिन वैश्विक सुस्ती के चलते उद्योगों से मांग कमजोर पड़ी है।

इसके साथ ही, शेयर और वायदा बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच बड़े ट्रेडर्स ने अचानक बिकवाली शुरू कर दी। सर्राफा बाजार का पुराना रुख रहा है कि सोना और चांदी अमूमन एक साथ चलते हैं, ऐसे में सोना टूटने के बाद चांदी में भी बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह

कमोडिटी मार्केट के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट के माहौल में निवेशकों को एकमुश्त पैसा लगाने से बचना चाहिए। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया की सलाह है कि सोने-चांदी की खरीदारी किश्तों में की जानी चाहिए। खरीदार कुछ हिस्सा अभी ले सकते हैं और बाकी खरीदारी 15 से 20 दिन के अंतराल पर करें। इसके अलावा, निवेश का मन बना रहे लोगों को अल्पकालिक यानी एक-दो महीने के बजाय 6 महीने से एक साल के नजरिए से ही बाजार में उतरना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इस हफ्ते सोने और चांदी के दामों में कितनी गिरावट आई है?

India Bullion and Jewellers Association (IBJA) के मुताबिक, एक हफ्ते में चांदी की कीमत 13,071 रुपए घटकर 1.81 लाख रुपए प्रति किलो रह गई है, जबकि 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,576 रुपए सस्ता होकर 1.40 लाख रुपए पर आ गया है।

सोना और चांदी के भाव गिरने के मुख्य कारण क्या हैं?

कीमतों में गिरावट की मुख्य वजहें अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर का मजबूत होना, बड़े निवेशकों द्वारा ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली करना और उद्योगों तथा आम खरीदारों की तरफ से मांग में कमी आना है।

इस महीने अब तक सोना और चांदी कितने सस्ते हुए हैं?

इस महीने चांदी के दाम 39,485 रुपए और सोने के दाम 8,084 रुपए तक नीचे आए हैं। एक अक्टूबर 2026 को चांदी 2.20 लाख रुपए और सोना 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स की निवेशकों को क्या सलाह है?

कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया की सलाह है कि सोने-चांदी की खरीदारी एकमुश्त करने के बजाय किश्तों में करें और निवेश के लिए 6 महीने से एक साल का लंबा नजरिया रखें।