अमेरिका में सिख ट्रक ड्राइवर इस समय गंभीर सुरक्षा संकट और दहशत के दौर से गुजर रहे हैं। पिछले दिनों ट्रक ड्राइवर गुरविंदर सिंह पर हुए हमले के बाद से अमेरिकी सिख समुदाय में चिंता का माहौल है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ ड्राइवर अब पहचान छुपाने के लिए अपनी पगड़ी और दाढ़ी तक छोड़ने को विवश हो रहे हैं।
सिख संगठनों के मुताबिक, इस माहौल का सीधा असर ड्राइवरों के रूट और काम करने के तौर-तरीकों पर पड़ रहा है। डर के इस साए में समुदाय के सामने रोजी-रोटी और पहचान बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
रिपब्लिकन बहुल रूटों से दूरी और सफर का जोखिम
नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी ट्रकिंग एसोसिएशन के सीईओ रमन ढिल्लों ने बताया कि कई ड्राइवर अब रिपब्लिकन बहुल राज्यों से गुजरने वाले रूटों को चुनने से हिचक रहे हैं। दूर-दराज के इलाकों में अकेले सफर करने वाले ड्राइवरों में यह डर लगातार बना हुआ है कि वे किसी नस्लीय हिंसा का शिकार न हो जाएं।
इस बीच, ट्रम्प प्रशासन की तरफ से अप्रवासियों के खिलाफ नीतियों को भी सख्त किया जा रहा है। प्रशासन राज्यों पर दबाव बना रहा है कि वे कुछ अप्रवासियों के कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करें और नए लाइसेंस जारी करने पर पाबंदियां लगाएं। इसके अलावा, भाषा संबंधी आवश्यकताओं को कड़ा कर दिया गया है और संघीय एजेंट चेकपॉइंट्स पर ड्राइवरों की इमिग्रेशन स्थिति की लगातार जांच कर रहे हैं।
आंकड़ों में सिख ड्राइवरों की स्थिति और हेट क्राइम
अमेरिका में कमर्शियल वाहन चलाने की अनुमति वाले करीब 2 लाख विदेशी लाइसेंस धारक ड्राइवर हैं, जिनमें से लगभग आधे सिख समुदाय से आते हैं। देश की कुल आबादी में सिख समुदाय की हिस्सेदारी बेहद कम है, इसके बावजूद वे धार्मिक आधार पर होने वाले हेट क्राइम में लगातार तीसरे सबसे अधिक निशाना बनाए जाने वाले समूहों में शामिल हैं।
एनर्जी और सोशल मीडिया पर बने माहौल ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। एनजीओ 'स्टॉप एपीआई हेट' के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच दक्षिण एशियाई लोगों को निशाना बनाकर फैलाए जाने वाले ऑनलाइन अपशब्दों और हेट स्पीच में 109% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
9/11 के आतंकवादी हमलों के बाद भी गलत पहचान (मिसइन्डेंटिफिकेशन) के चलते सिख समुदाय पगड़ी और दाढ़ी के कारण बड़े पैमाने पर हिंसा और नफरत का शिकार बना था। मौजूदा हालात ने समुदाय के लोगों को उसी पुराने दौर के डर की याद दिला दी है।
