भोपाल में बारिश के बीच डेंगू का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है, लेकिन सरकारी आंकड़ों और अस्पतालों में भर्ती संदिग्ध मरीजों की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस साल अब तक एलिजा जांच के आधार पर 52 डेंगू पॉजिटिव केस दर्ज किए गए हैं, जबकि शहर के अस्पतालों में 165 संदिग्ध डेंगू मरीज भर्ती हैं। दरअसल, डेंगू की पुष्टि के लिए होने वाली एलिजा जांच की रिपोर्ट आने में करीब दो दिन लग रहे हैं। रैपिड टेस्ट में डेंगू की आशंका होने पर डॉक्टर मरीज का इलाज शुरू कर देते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में केस तभी दर्ज होता है जब एलिजा रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। इसी वजह से अस्पतालों की वास्तविक स्थिति और सरकारी आंकड़ों में अंतर दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एम्स के आसपास की कॉलोनियों के अलावा कटारा हिल्स, बागसेवनिया, अवधपुरी, शाहजहांनाबाद और इस्लामिया गेट क्षेत्र में भी डेंगू के संदिग्ध मरीज सामने आ रहे हैं। बारिश के कारण शहर के करीब 1.5 लाख खाली प्लॉटों में पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ गया है। डॉक्टरों के अनुसार अचानक तेज बुखार, सिर या माथे में तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण डेंगू की आशंका की ओर इशारा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द, कमजोरी, उल्टी, खून आने या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। एलिजा रिपोर्ट के इंतजार में इलाज में देरी करना जोखिम बढ़ा सकता है, इसलिए लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।