भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस और विपक्ष संसद की कार्यवाही बाधित करने के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से भाग रहे है। विपक्ष का उद्देश्य सदन को चलने देना नहीं, बल्कि हंगामा कर सुर्खियां बटोरना रह गया है। शून्यकाल हो, प्रश्नकाल हो या किसी विधेयक पर चर्चा, कांग्रेस किसी भी विषय पर गंभीरता से चर्चा में शामिल नहीं होना चाहती। राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के नेता बिना तैयारी के सदन में आते हैं और बार-बार अपना स्टैंड बदलते हैं। कभी किसी विषय पर चर्चा की मांग करते हैं, सरकार चर्चा के लिए तैयार हो जाती है तो वे सदन नहीं चलने देते। कभी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं, कभी केंद्रीय गृह मंत्री के सदन में जवाब की मांग करते हैं और जब सरकार जवाब देने के लिए तैयार होती है तो चर्चा से पीछे हट जाते हैं। यह कांग्रेस की दोहरी और अवसरवादी राजनीति को दर्शाता है।
भापजा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस आज पेपरलीक के मुद्दे पर राजनीति कर रही है, लेकिन जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, तब प्रदेश में 17 बार पेपरलीक की घटनाएं हुईं। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं पेपरलीक रोकने में असमर्थता जाहिर कर चुके थे। तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा भी पेपरलीक को लेकर जिम्मेदारी से बचने वाला बयान दिया गया था। जब राजस्थान में लगातार पेपरलीक की घटनाएं हुईं, तब कांग्रेस सरकार ने जिम्मेदारी तय करने के बजाय पूरे मामले से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया। आज वही कांग्रेस केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग रही थी। कांग्रेस का यह दोहरा चरित्र अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आज झारखंड में भी छात्र पेपरलीक और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विषयों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान छात्रों की तबीयत खराब होने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में राहुल गांधी वहां क्यों नहीं जा रहे? वे झारखंड सरकार और मुख्यमंत्री से इस्तीफा क्यों नहीं मांग रहे हैं? यदि पेपरलीक के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांगना कांग्रेस की नीति है, तो झारखंड में भी उसी प्रकार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कांग्रेस को बताना चाहिए कि अलग-अलग राज्यों में एक ही विषय पर उसके अलग-अलग मापदंड क्यों हैं? राठौड़ ने कहा कि पंजाब में भी पेपरलीक के मामलों को लेकर सवाल उठे हैं। दिल्ली में बैठकर हंगामा करने वाले कांग्रेस नेता और विपक्षी दल पंजाब में उसी मुद्दे पर चुप क्यों हैं? जनता सब देख रही है और कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र को समझ रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष लगातार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार स्पष्ट रूप से कह चुकी है कि संबंधित विषय पर सदन में चर्चा होगी और गृह मंत्री जवाब देंगे। ऐसे में विपक्ष को चर्चा में भाग लेना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि जब अमित शाह सदन में जवाब देने आएं तो राहुल गांधी सदन से भागें नहीं, बल्कि चर्चा में शामिल होकर अपनी बात रखें। विपक्ष को सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय संसदीय परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। संसद की कार्यवाही पर देश का करोड़ों रुपये खर्च होता है। यदि विपक्ष लगातार हंगामा कर सदन का समय बर्बाद करता है तो यह देश के संसाधनों का अपमान है। जीरो आवर और प्रश्नकाल जैसे महत्वपूर्ण समय में भी व्यवधान डालना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। सरकार राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े संशोधन विधेयक और पेपरलीक जैसी घटनाओं पर कठोर दंड का प्रावधान करने वाले विधेयक लेकर आई, लेकिन विपक्ष इन महत्वपूर्ण विषयों पर भी सार्थक चर्चा करने के बजाय हंगामा कर रहा है। संसद कानून बनाने और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा करने का सर्वोच्च मंच है। विपक्ष को जनता से जुड़े विषयों पर चर्चा करनी चाहिए, न कि बाहर हंगामा करके केवल सुर्खियां बटोरनी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने झारखंड में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उनकी गिरफ्तारी पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसकी स्वतंत्रता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। पत्रकारों को गिरफ्तार करना और उनके साथ दुर्व्यवहार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
कांग्रेस का अशोभनीय व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। देश की जनता अब कांग्रेस की इस दोहरी राजनीति को पहचान चुकी है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
