Wednesday, 30 September 2026
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छिंदवाड़ा में शकीरा मिर्च की खेती: 55 दिन में पहली तुड़ाई और 11 क्विंटल उत्पादन, करला कला में आयोजित हुआ खेत दिवस

संक्षेप में

छिंदवाड़ा के करला कला गांव में नामदेव उमाजी एग्रीटेक द्वारा शकीरा मिर्च की फसल पर खेत दिवस आयोजित किया गया। किसान आकाश चंद्रवंशी के खेत पर 55 दिन में पहली तुड़ाई से 11 क्विंटल उत्पादन मिला, और इस किस्म के दोहरे उपयोग (हरी व सूखी मिर्च) की जानकारी दी गई।

मुख्य बातें

  • करला कला गांव में 29 सितंबर को शकीरा मिर्च का खेत दिवस आयोजित हुआ।
  • किसान आकाश चंद्रवंशी ने 12 हजार पौधों की नर्सरी से फसल तैयार की।
  • फसल की पहली तुड़ाई 55 दिन में हुई जिससे 11 क्विंटल उत्पादन मिला।
  • शकीरा मिर्च की प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता 25 से 40 टन तक बताई गई।
मध्य प्रदेश
छिंदवाड़ा में शकीरा मिर्च की खेती: 55 दिन में पहली तुड़ाई और 11 क्विंटल उत्पादन, करला कला में आयोजित हुआ खेत दिवस

छिंदवाड़ा के ग्राम करला कला में शकीरा मिर्च की फसल की खूबियों को लेकर खेत दिवस का आयोजन किया गया। नामदेव उमाजी एग्रीटेक द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों ने खेत पर जाकर फसल की वृद्धि, फलधारण और उत्पादन क्षमता का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।

55 दिन में पहली तुड़ाई और बंपर उत्पादन

कार्यक्रम के दौरान किसान आकाश चंद्रवंशी के खेत का निरीक्षण किया गया, जिन्होंने इस वर्ष शकीरा मिर्च की खेती की है। उन्होंने लगभग 12 हजार पौधों की नर्सरी से फसल तैयार की है, जिसकी पहली तुड़ाई करीब 55 दिन में शुरू हुई। पहली तुड़ाई से ही लगभग 11 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ।

30 सितंबर तक फसल करीब 63 से 64 दिन की हो चुकी थी और पौधों पर अच्छी मात्रा में फल लदे नजर आए। किसान के अनुसार, सामान्य खेती प्रबंधन के बावजूद पौधों में अच्छी वृद्धि, फल की लंबाई, गहरा हरा रंग और स्वस्थ फलधारण देखने को मिला। उन्होंने अगली तुड़ाई में करीब 25 क्विंटल उत्पादन मिलने की उम्मीद जताई है।

शकीरा मिर्च की विशेषताएं और दोहरा उपयोग

कार्यक्रम में शामिल हुए दूसरे किसान राजू चंद्रवंशी ने फसल का मुआयना करने के बाद बताया कि इसमें पत्तियों का मुड़ाव कम है और पौधे पूरी तरह स्वस्थ नजर आ रहे हैं। उन्होंने मिर्च के आकार, गहरे हरे रंग और तीखेपन की तारीफ करते हुए आगामी सीजन में अपने खेत पर भी यही प्लॉट लगाने की योजना बनाई है।

नामदेव उमाजी एग्रीटेक के छिंदवाड़ा क्षेत्र के सेल्स एग्जीक्यूटिव अरविंद पटेल ने बताया कि इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका दोहरा उपयोग है। कंपनी के अनुसार, सामान्य प्रबंधन में शकीरा मिर्च का उत्पादन 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलता है, जबकि बेहतर तकनीक अपनाने पर यह आंकड़ा 33 से 40 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।

हरी मिर्च के भाव न मिलने पर सूखा मिर्च बेचने का विकल्प

बाजार भाव को लेकर किसानों के सामने आने वाली दिक्कतों पर कंपनी के अधिकारियों ने एक नया विकल्प भी सुझाया। अरविंद पटेल ने बताया कि कई बार बंपर पैदावार के बावजूद हरी मिर्च का मनमुताबिक भाव बाजार में नहीं मिल पाता है।

ऐसी स्थिति में किसान फसल को पौधे पर ही पूरी तरह पकाकर लाल या सूखी मिर्च के रूप में तैयार कर सकते हैं। सूखी मिर्च के रूप में विपणन करने से किसानों को बाजार की मांग के अनुसार फसल बेचने का अतिरिक्त विकल्प मिल जाता है।

नर्सरी प्रबंधन और पौधे तैयार करने के गुर

खेत दिवस के दूसरे सत्र में रवि हाईटेक नर्सरी के प्रोपराइटर राजा चौधरी ने किसानों को वैज्ञानिक नर्सरी प्रबंधन की बारीकियां समझाईं। उन्होंने मिर्च और गेंदा जैसी फसलों के लिए स्वस्थ पौधे तैयार करने, शुरुआती दौर में उनकी देखभाल करने और खेत में रोपाई तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी।

कार्यक्रम में पहुंचे किसानों ने फसल की लंबाई, रंग, तीखेपन और दोहरे उपयोग की प्रक्रिया को अपनी आंखों से देखा। इस आयोजन से स्थानीय किसानों को न केवल बेहतर फसल प्रबंधन के गुर मिले, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने के नए रास्ते भी पता चले।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छिंदवाड़ा के करला कला में कौन सा कार्यक्रम आयोजित किया गया?

छिंदवाड़ा के ग्राम करला कला में 29 सितंबर को नामदेव उमाजी एग्रीटेक द्वारा शकीरा मिर्च की फसल को लेकर खेत दिवस का आयोजन किया गया था।

शकीरा मिर्च की पहली तुड़ाई कितने दिनों में शुरू हुई?

किसान आकाश चंद्रवंशी के अनुसार, शकीरा मिर्च की फसल की पहली तुड़ाई करीब 55 दिन में शुरू हुई जिससे लगभग 11 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ।

शकीरा मिर्च की प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता कितनी है?

कंपनी के अनुसार सामान्य प्रबंधन में इसका उत्पादन 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर तथा बेहतर तकनीक अपनाने पर 33 से 40 टन प्रति हेक्टेयर तक हो सकता है।

शकीरा मिर्च का दोहरा उपयोग किस तरह किया जा सकता है?

हरी मिर्च का सही भाव न मिलने पर किसान फसल को पौधे पर ही पकाकर सूखी मिर्च के रूप में तैयार कर सकते हैं और बाजार में बेच सकते हैं।