राजस्थान पंचायतीराज चुनाव में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ के परिवार के राजनीतिक मैदान में उतरने से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। उनके बेटे पराक्रम सिंह और पुत्रवधू कनिका सिंह ने चूरू जिला परिषद चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के सिंबल पर नामांकन दाखिल किया है। दोनों ने इस चुनाव के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा है, लेकिन नामांकन के साथ दिए गए संपत्ति के हलफनामे ने सूबे की राजनीति में खासी चर्चा बटोर ली है।
145 करोड़ की संपत्ति, पर नहीं है एक भी वाहन
जिला परिषद चुनाव के लिए दाखिल किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, पराक्रम सिंह और कनिका सिंह की कुल चल-अचल संपत्ति करीब 145 करोड़ रुपए है। इतनी भारी-भरकम संपत्ति के मालिक होने के बावजूद दोनों पति-पत्नी के नाम पर एक भी व्यक्तिगत वाहन यानी कार, जीप या दोपहिया गाड़ी पंजीकृत नहीं है। हलफनामे में सामने आए इस आंकड़े ने राजनीतिक हलकों में हर किसी का ध्यान खींचा है।
कनिका सिंह के पास शेयरों और सोने का बड़ा पोर्टफोलियो
राजेंद्र राठौड़ की पुत्रवधू कनिका सिंह के पास निवेश और गहनों का बड़ा हिस्सा है। हलफनामे के ब्योरे के अनुसार:
- विभिन्न कंपनियों के शेयरों और म्यूचुअल फंड्स में करीब 57.70 करोड़ रुपए का निवेश है।
- विभिन्न बचत योजनाओं में 98 लाख रुपए से ज्यादा जमा हैं।
- उनके पास एक किलोग्राम सोना और 20 किलोग्राम चांदी है, जिसकी कुल कीमत लगभग 1.85 करोड़ रुपए आंकी गई है।
- जयपुर में उनके नाम पर 5.50 करोड़ रुपए मूल्य की कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज दर्ज हैं।
पराक्रम सिंह के पास करोड़ों के शेयर और दिए गए लोन
दूसरी ओर, पराक्रम सिंह की ओर से दाखिल हलफनामे में भी भारी-भरकम निवेश की जानकारी दी गई है। उनके पास म्यूचुअल फंड और शेयरों में 62.11 करोड़ रुपए का बड़ा निवेश है। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न फर्मों और व्यक्तियों को 50.41 करोड़ रुपए उधार दे रखे हैं। अचल संपत्ति के मोर्चे पर उनके पास 17.96 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन और फ्लैट हैं, जबकि उनके पास 14.50 लाख रुपए मूल्य का 100 ग्राम सोना भी है।
पहले RCA चुनावों में भी चर्चा में रहे थे पराक्रम
बीजेपी के दिग्गज नेता के परिवार का एक साथ जिला परिषद चुनाव में उतरना इस बार चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इससे पहले पराक्रम सिंह ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव के दौरान भी नामांकन दाखिल कर सुर्खियों बटोरी थी, हालांकि बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। अब चूरू जिला परिषद चुनाव में दोनों की उम्मीदवारी से सियासी समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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