कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर मनाए जाने वाले दिवाली के पर्व पर घरों में रोशनी और लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शाम के समय विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के बाद घर के हर कोने में दीपक जलाए जाते हैं। इस दौरान एक खास वैदिक मंत्र के उच्चारण से घर में सुख-समृद्धि का वास माना जाता है।
दीप प्रज्वलन का विशेष मंत्र और उसका अर्थ
यूट्यूब चैनल पर साझा किए गए एक धार्मिक प्रसंग में आचार्य पुंडरीक गोस्वामी ने दीपावली के दिन दीपक जलाते समय एक विशेष श्लोक के उच्चारण का विधान बताया है। दीपमालाओं की सेवा के दौरान इस मंत्र का पाठ किया जाता है:
"त्वं ज्योतिः श्री रविश्चंद्रो विद्युत्सौवर्ण तारकः। सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपज्योतिः स्थिता तु या..."
इस श्लोक का अर्थ है कि हे देवी! सूर्य, चंद्रमा, बिजली, सुवर्ण और तारे—यह सभी आपके ही प्रकाश स्वरूप हैं। आप ही समस्त ज्योतियों में परम ज्योति और दीप की लौ के रूप में विराजमान हैं। इस मंत्र के माध्यम से मां लक्ष्मी का आह्वान किया जाता है।
शुभ मुहूर्त और प्रदोष काल का समय
मान्यता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिस घर में स्वच्छता और दीपों का दिव्य प्रकाश होता है, वहां उनका स्थायी वास होता है। इसी वजह से शाम को मुख्य द्वार से लेकर घर के प्रत्येक कोने में दीये सजाए जाते हैं।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दिवाली की शाम को दीये जलाने का शुभ समय शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही प्रदोष काल का समय शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस समयावधि में पूजा और दीपदान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
