राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल सत्र सोमवार को इंदौर के डेली कॉलेज परिसर में शुरू हो गया। चार नवंबर तक चलने वाले इस महाधिवेशन में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और छह सह सरकार्यवाह समेत देश के 46 प्रांतों से करीब 408 प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं।
आयोजन के पहले दिन शताब्दी वर्ष के दौरान हुए सांगठनिक आयोजनों की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा की गई। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने मीडिया को जानकारी दी कि पिछले एक साल में संघ के कार्य विस्तार में तेजी आई है और देशभर में दैनिक शाखाओं का आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच गया है।
देश में एक लाख से ज्यादा दैनिक शाखाएं
कार्यकारी मंडल के पहले सत्र में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, देश में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1,01,151 हो गई है। साप्ताहिक मिलन और मासिक मिलन केंद्रों को जोड़ लिया जाए तो संघ की कुल सक्रिय उपस्थिति 1,10,849 स्थानों तक फैल चुकी है।
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के इस दौर में 13 हजार से ज्यादा नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं। बैठक में इन नए केंद्रों के सुदृढ़ीकरण और सांगठनिक समन्वय को बनाए रखने की रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है।
65 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित
शताब्दी वर्ष के विशेष अभियानों के तहत देशभर में कुल 65,660 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। इनमें शहरी क्षेत्रों के भीतर बस्ती स्तर और ग्रामीण इलाकों में आठ से दस गांवों के समूहों को मिलाकर मंडल स्तर पर कार्यक्रम तय किए गए थे।
आंबेकर ने बताया कि इन आयोजनों के जरिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का दायरा बढ़ा है और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिला है। कई जगहों पर स्थानीय नागरिकों ने सीधे शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई है, जिसकी समीक्षा इस तीन दिवसीय सत्र में की जा रही है।
महिलाओं की भागीदारी और युवा विरोधी नशा अभियान एजेंडे में
सत्र के दौरान महिलाओं की सांगठनिक सहभागिता बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रमों और उपक्रमों की रूपरेखा पर भी मंथन हो रहा है। इसके अलावा, युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों को नशे की गिरफ्त से दूर रखने के लिए राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव मुख्य एजेंडे में शामिल है।
संघ की पिछली बैठकों में भी ड्रग्स और नशीले पदार्थों के बढ़ते चलन पर चिंता जताई गई थी। इस बार सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से इस समस्या के खिलाफ पारिवारिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी।
चर्चा के अंतिम दिन 4 नवंबर को संघ की ओर से इन तमाम सत्रों और कार्यविस्तार के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे।
