मध्य प्रदेश के कटनी जिले में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बारिश और उफनते नालों की चुनौती भी भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की डोर को कमजोर नहीं कर सकी। ढीमरखेड़ा मुख्यालय के पास कौभी नाले पर बने रपटे के ऊपर से तेज पानी बहने के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आवाजाही करते नजर आए। पर्व के उत्साह के बीच सामने आई इस तस्वीर ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक इंतजामों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रपटे के ऊपर से बह रहा था पानी
यह मामला ढीमरखेड़ा-मुरवारी-सिलौंडी मार्ग पर देवरी गांव के समीप का है। शुक्रवार को सुबह से ही क्षेत्र में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी था, जिसकी वजह से कौभी नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। हालात यह हो गए कि नाले का पानी पुलिया या रपटे के ऊपर से बहने लगा।
बावजूद इसके, रक्षाबंधन के दिन घरों से निकलने वाले लोगों का तांता नहीं थमा। कई लोग अपने दोपहिया वाहनों को लेकर उफनते पानी के बीच से ही रपटा पार करते दिखे। ग्रामीण इलाकों से भाई अपनी बहनों के घर राखी बंधवाने के लिए निकलते रहे और पानी के तेज बहाव के बीच से गुजरकर गंतव्य तक पहुंचे।
कलाई पर सजी राखियां, उत्साह पर भारी पड़ी मुश्किलें
त्योहार के चलते ढीमरखेड़ा क्षेत्र की सड़कों और मार्गों पर सुबह से ही चहल-पहल बनी हुई थी। बाइक और अन्य वाहनों से भाई बहनों के घर पहुंच रहे थे। नाले पर जोखिम भरे हालात के बाद भी लोगों की आवाजाही जारी रहने से रास्ते भर खतरे की स्थिति बनी रही।
गंतव्य पर पहुंचने वाले भाइयों की कलाई पर सजी रंग-बिरंगी राखियां इस बात की गवाही दे रही थीं कि खराब मौसम और बारिश भी इस पर्व के उत्साह को कम नहीं कर पाई। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक कर आरती उतारी और कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। इसके बाद भाइयों ने उपहार भेंट कर उनकी रक्षा करने और हर सुख-दुख में साथ निभाने का संकल्प लिया।
हर साल बारिश में क्यों बढ़ता है खतरा?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, देवरी के समीप कौभी नाले का यह रपटा बारिश के हर सीजन में परेशानी का सबब बनता है। थोड़ी सी भी बारिश होने पर नाले का जलस्तर बढ़ जाता है और पानी सीधे रपटे के ऊपर से बहने लगता है।
शुक्रवार को भी यही स्थिति देखने को मिली, जब पानी के तेज बहाव के बीच से लोग निकलते रहे। जानकारों का कहना है कि जलस्तर अचानक बढ़ने की स्थिति में यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। पर्व के उल्लास के बीच इस खतरनाक रास्ते से गुजरने की मजबूरी ने एक बार फिर इस मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों और स्थाई पुल निर्माण की मांग को तूल दे दिया है।
