Friday, 25 September 2026
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नीमच मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मॉडल पर देने का विरोध: पढ़ाई छोड़कर सड़क पर उतरे छात्र, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

संक्षेप में

नीमच के शासकीय मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मॉडल पर चलाने के प्रस्ताव के विरोध में मेडिकल छात्र सड़क पर उतर आए हैं। गुरुवार को छात्रों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और कॉलेज को पूरी तरह सरकारी व्यवस्था में रखने की मांग की।

मुख्य बातें

  • नीमच मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मॉडल पर देने के खिलाफ छात्रों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।
  • छात्रों ने कलेक्टर को 8 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर कॉलेज को सरकारी व्यवस्था में रखने की मांग की।
  • छात्रों ने फीस बढ़ने और इलाज महंगा होने की चिंता जताई है।
मध्य प्रदेश
नीमच मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मॉडल पर देने का विरोध: पढ़ाई छोड़कर सड़क पर उतरे छात्र, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

नीमच के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर संचालित करने के सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं पढ़ाई छोड़कर हाथों में तख्तियां लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां छात्रों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कॉलेज और संबद्ध अस्पताल को पूरी तरह सरकारी व्यवस्था के तहत ही संचालित रखने की मांग की।

प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने कड़ी मेहनत से NEET परीक्षा पास कर सरकारी संस्थान समझकर प्रवेश लिया था। ऐसे में कोर्स के बीच में कॉलेज को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय उनके करियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब या राहत नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए इलाज के संकट की आशंका

छात्रों ने ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया कि नीमच मेडिकल कॉलेज केवल शिक्षा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पूरा जिला और आसपास के ग्रामीण अंचल के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के इलाज का मुख्य सहारा है। निजी हाथों में संचालन जाने से अस्पताल में मिलने वाली मुफ्त दवाएं, जांच और सामान्य इलाज महंगा होने की आशंका है।

डॉ. साहिल और डॉ. शिखा सिंह सहित अन्य प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि वर्तमान में कॉलेज में करीब 200 छात्र NEET उत्तीर्ण कर अध्ययन कर रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि कॉलेज के निजीकरण से न केवल मेडिकल शिक्षा की फीस बढ़ेगी, बल्कि अस्पताल की व्यवस्था बदलने से उनकी अपनी क्लीनिकल ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित होगी।

8 सूत्रीय मांगों के साथ ज्ञापन

कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्रों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें कॉलेज को पीपीपी मॉडल पर देने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने, कॉलेज और अस्पताल को पूरी तरह सरकारी व्यवस्था में बनाए रखने और डॉक्टर, नर्स व तकनीकी स्टाफ के रिक्त पदों को भरने की मांग शामिल है।

इसके अलावा छात्रों ने मांग की है कि मरीजों के लिए मुफ्त जांच और दवा की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि गरीब तबके के लोगों को परेशानी न हो। साथ ही, नीतिगत बदलाव से पहले जनप्रतिनिधियों, स्थानीय डॉक्टरों, कर्मचारियों और छात्रों के साथ खुली चर्चा कर असर का अध्ययन कराने की बात कही गई है। छात्रों के मुताबिक, इस मामले को लेकर उन्होंने क्षेत्रीय सांसद से भी चर्चा की थी, लेकिन वहां से कोई स्पष्ट और संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला, जिसके बाद उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नीमच मेडिकल कॉलेज के छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?

नीमच मेडिकल कॉलेज के छात्र सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं जिसके तहत कॉलेज और अस्पताल को पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल पर चलाने की तैयारी है।

छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?

छात्रों की मांग है कि मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल को पूरी तरह सरकारी व्यवस्था के तहत संचालित किया जाए, पीपीपी प्रस्ताव को वापस लिया जाए और छात्रों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग तथा मरीजों के मुफ्त इलाज को सुरक्षित रखा जाए।

छात्रों ने प्रशासन को क्या कदम उठाने को कहा है?

छात्रों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि पीपीपी प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए, स्टाफ बढ़ाया जाए और इस निर्णय के असर पर छात्रों व आम लोगों से चर्चा की जाए।

छात्रों का आंदोलन कब तक जारी रहेगा?

छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार या प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब या समाधान नहीं मिलता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।