सार्वजनिक स्थलों और सरकारी भवनों पर अवैध रूप से लगाए गए पोस्टर और बैनर अब प्रत्याशियों के चुनावी खर्च का हिस्सा बनेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आदर्श आचार संहिता और राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 का उल्लंघन करने पर खर्च सीमा पार होने पर उम्मीदवारों को आगामी चुनावों के लिए अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।
प्रदेश के 41 जिलों के 10,245 वार्डों में हो रहे इन चुनावों के लिए अब कुल 38,891 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। स्क्रूटनी के दौरान तकनीकी खामियों के कारण 17,137 नामांकन पत्र खारिज किए गए थे, जबकि 10,112 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए। इसके अलावा अब तक 77 पार्षद निर्विरोध चुने जा चुके हैं।
1 सितंबर तक सवा लाख से ज्यादा होर्डिंग हटाए
राज्य में 19 अगस्त को चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई थी। इसके बाद से ही अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। बार-बार निर्देशों के बावजूद कई प्रत्याशी सड़कों, गलियों, चौराहों और सरकारी दीवारों पर प्रचार सामग्री लगा रहे हैं। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 1 सितंबर तक सवा लाख से अधिक अवैध बैनर और पोस्टर हटाए जा चुके हैं।
बिजली के खंभों, सरकारी दीवारों और चौराहों पर किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार का प्रचार करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। बिना संपत्ति मालिक की लिखित अनुमति के निजी मकानों पर पोस्टर चिपकाना या झंडा लगाना भी आचार संहिता का उल्लंघन माना गया है। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों और व्यय पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों को नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी दी जाए।
क्या है कानूनी प्रावधान?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 की धारा 3 के तहत सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को बिना अनुमति विरूपित करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि इस कानून के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर 5,000 रुपए तक का जुर्माना और एक महीने तक की जेल हो सकती है। गलती दोहराने पर जुर्माना बढ़ाकर 10,000 रुपए तक किया जा सकता है।
इस बार बढ़ी चुनावी खर्च की सीमा
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार निकाय चुनाव के लिए चुनावी खर्च की सीमा में संशोधन किया है। नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्रों के प्रत्याशी अब पिछले चुनावों की तुलना में एक-एक लाख रुपए अधिक खर्च कर सकेंगे, जबकि नगरपालिका के उम्मीदवारों के लिए खर्च सीमा 50,000 रुपए तक बढ़ाई गई है। आयोग का यह कदम चुनाव में धनबल के प्रभाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
