इंदौर अधिवक्ता संघ ने ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर के प्राचीन स्वरूप और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण की मांग को प्रमुखता से उठाया है। संघ का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर यहां की प्राकृतिक और ऐतिहासिक पहचान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
यह मामला अधिवक्ता अभीष्ट मिश्रा के सान्निध्य में उठाया गया है। अधिवक्ताओं के मुताबिक ओंकारेश्वर की विशिष्ट पहचान यहां स्थित तीन पुरियों—ब्रह्मपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी—के साथ प्राकृतिक रूप से बने 'ओम' आकार के पर्वत से जुड़ी हुई है। इन सभी संरचनाओं का धार्मिक और भौगोलिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है।
निर्माण कार्यों पर चिंता और संरक्षण की मांग
संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि ओंकारेश्वर क्षेत्र में हो रहे विभिन्न निर्माण कार्यों से यदि यहां के प्राचीन भौगोलिक स्वरूप और धार्मिक पहचान पर असर पड़ता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा नुकसान होगा। विकास कार्यों और धार्मिक विरासत के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
स्थानीय स्तर पर भी इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग निर्माण कार्यों की अनुमति देते समय पर्यावरण और ऐतिहासिक महत्व का कितना ध्यान रख रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाता है।
