जयपुर में गुरुवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे को हरी झंडी दे दी गई। इसके अलावा राज्य कर्मचारियों के प्रमोशन में दो साल की छूट, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में बदलाव और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी सप्लाई के लिए पांच-स्तरीय ढांचे के गठन समेत कई अहम फैसले लिए गए हैं। बैठक के बाद मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन फैसलों की जानकारी दी।

यूसीसी बिल को मंजूरी, विवाह-तलाक का पंजीकरण अनिवार्य

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि कैबिनेट ने यूसीसी बिल को मंजूरी दे दी है। इस कानून के दायरे से आदिवासी और अनुसूचित जनजाति को बाहर रखा गया है। नए प्रावधानों के तहत बहुविवाह पर प्रतिबंध रहेगा और सभी विवाहों व तालकों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा।

कानून लागू होने के बाद होने वाले विवाहों का 60 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप की शुरुआत और समाप्ति की लिखित सूचना देना जरूरी होगा। नियम का पालन न करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना और नोटिस मिलने पर भी अनदेखी करने पर 25 हजार रुपये तक का दंड लगाया जा सकता है। लिव-इन में जन्मे बच्चों को संपत्ति और अन्य कानूनी अधिकार मिलेंगे, जबकि पिता को भी उत्तराधिकार का हकदार बनाया जा सकेगा।

कर्मचारियों के प्रमोशन और अनुकंपा नियुक्ति पर राहत

सरकार ने राज्य कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ देने के लिए सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। जिन काडरों के कर्मियों को वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में अनुभव में छूट का लाभ मिला था, उन्हें वर्ष 2026-27 में भी पदोन्नति के लिए अनुभव में दो साल की सशर्त छूट दी जाएगी।

एक अन्य फैसले में मृतक सरकारी कर्मचारी की पुत्र-वधू को भी अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में शामिल कर लिया गया है। वहीं, राजस्थान सेवा नियम, 1951 में संशोधन के तहत राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद दो साल के भीतर नौकरी छोड़ने पर अब केवल ट्रेनिंग का ही खर्च वसूला जाएगा, वेतन-भत्तों की रिकवरी नहीं होगी। सरकारी विभाग या उपक्रम में नई नौकरी मिलने पर पद छोड़ने पर किसी तरह की वसूली नहीं की जाएगी।

चाइल्ड केयर लीव और ग्रामीण जलापूर्ति ढांचा

महिला कर्मचारियों के लिए एकल श्रेणी (सिंगल मदर) की कामकाजी महिलाओं को अब एक कैलेंडर वर्ष में चाइल्ड केयर लीव (CCL) तीन की जगह छह चरणों में मिल सकेगी। सरोगेसी के मामलों में सरोगेट मदर को 180 दिन और कमीशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश मिलेगा।

ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति की निगरानी के लिए पांच-स्तरीय संस्थागत ढांचा बनाया जाएगा। इसके तहत ग्राम पंचायत, क्लस्टर समिति, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर समितियां काम करेंगी। दैनिक रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) की होगी, जिन्हें तकनीकी मदद के लिए पांच से छह पंचायतों पर एक क्लस्टर समिति से जोड़ा जाएगा।