Monday, 28 September 2026
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राजस्थान निकाय चुनाव: 10 में से 9 निगमों में भाजपा का बोर्ड, आदिवासी अंचल में भारत आदिवासी पार्टी को झटका

संक्षेप में

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों में भाजपा ने 10 में से 9 नगर निगमों और कुल 204 निकायों में बोर्ड बनाया है, जबकि कांग्रेस 96 सीटों पर सिमट गई। आदिवासी बहुल बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ में भी भाजपा ने बढ़त हासिल की, जिससे भारत आदिवासी पार्टी को बड़ा झटका लगा है।

मुख्य बातें

  • प्रदेश के 10 में से 9 नगर निगमों में भाजपा का बोर्ड बना
  • भाजपा ने कुल 204 निकायों में जीत दर्ज की
  • कांग्रेस पार्टी 96 निकायों तक सिमटकर रह गई
  • बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ की 9 में से 7 निकायों में भाजपा जीती
  • भारत आदिवासी पार्टी (BAP) आदिवासी अंचल में एक भी निकाय में बोर्ड नहीं बना सकी
उदयपुर संभाग
राजस्थान निकाय चुनाव: 10 में से 9 निगमों में भाजपा का बोर्ड, आदिवासी अंचल में भारत आदिवासी पार्टी को झटका

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी सफलता हासिल की है। प्रदेश के 10 में से 9 नगर निगमों में भाजपा का बोर्ड बन गया है, जबकि कुल 204 निकायों में पार्टी ने बहुमत के साथ जीत दर्ज की है। इसके मुकाबले कांग्रेस पार्टी 96 निकायों में सिमटकर रह गई है। इन परिणामों में सबसे खास बात बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जैसे आदिवासी बहुल जिलों में भाजपा का बेहतर प्रदर्शन रहा है, जहां भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के भील प्रदेश के राजनीतिक एजेंडे को बड़ा झटका लगा है।

आदिवासी अंचल में भाजपा की सेंध

बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों की कुल 9 निकायों में से 7 पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। बांसवाड़ा की 3 निकायों में से दो पर भाजपा और एक पर कांग्रेस जीती है। डूंगरपुर की दोनों निकायों में भाजपा का बोर्ड बना है, जबकि प्रतापगढ़ की 4 निकायों में से 3 पर भाजपा और एक पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। शहरी निकाय चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इन आदिवासी बहुल जिलों का दौरा किया था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक और भारत आदिवासी पार्टी की पहचान की राजनीति के बीच भाजपा ने अपने संगठनात्मक कौशल से मजबूत पैठ बनाई है।

कमजोर हुआ 'बाप' पार्टी का प्रभाव

इससे पहले लोकसभा चुनाव 2024 में भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार रोत ने बांसवाड़ा सीट पर 2 लाख 47 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी। विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के 4 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे और वह राज्य की तीसरी सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरी थी। हालांकि, शहरी निकाय चुनावों में पार्टी एक भी नगर निकाय में अपना बोर्ड नहीं बना सकी। विशेषज्ञों के अनुसार, लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पहचान और 'भील प्रदेश' के मुद्दों पर लोगों का समर्थन मिलने के बावजूद पार्टी स्थानीय स्तर पर अपना संगठनात्मक ढांचा मजबूत नहीं कर पाई।

संगठन और वैचारिकी की रणनीति

आदिवासी अंचल में भाजपा की इस बढ़त के पीछे पार्टी का मजबूत राजनीतिक मैनेजमेंट और आरएसएस से जुड़े संगठनों की सक्रियता मुख्य वजह रही है। वनवासी कल्याण परिषद लंबे समय से इन क्षेत्रों में वैचारिक स्तर पर काम कर रही है, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत हुई है। इसके अलावा भाजपा लगातार विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दों को इन इलाकों तक ले जाती रही है। चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के मुकाबले भाजपा का बूथ प्रबंधन अधिक प्रभावी साबित हुआ है।

पंचायत चुनावों की सियासी तैयारी

निकाय चुनावों में मिली सफलता के बाद भाजपा ने अब आगामी पंचायतीराज चुनावों के लिए अपनी रणनीतिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रतापगढ़ और उदयपुर के दौरे के दौरान स्थानीय नेताओं और आम नागरिकों से संवाद किया। पार्टी का संगठनात्मक ढांचा अब ग्रामीण स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए योजनाओं के प्रचार में जुट गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान निकाय चुनावों में भाजपा को कितनी सीटों पर सफलता मिली?

प्रदेश के 10 में से 9 नगर निगमों में भाजपा का बोर्ड बना है और कुल 204 निकायों में पार्टी ने जीत दर्ज की है।

आदिवासी अंचल में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का प्रदर्शन कैसा रहा?

बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ के आदिवासी अंचल में BAP एक भी निकाय में अपना बोर्ड बनाने में असफल रही।

कांग्रेस पार्टी इन चुनावों में कहां तक सीमित रही?

कांग्रेस पार्टी इन निकाय चुनावों में केवल 96 निकायों तक ही सिमटकर रह गई।

आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा की सफलता के मुख्य कारण क्या हैं?

मजबूत संगठनात्मक मैनेजमेंट, मुख्यमंत्री के दौरे और वनवासी कल्याण परिषद के वैचारिक कार्यों को भाजपा की सफलता का मुख्य कारण माना जा रहा है।