Wednesday, 30 September 2026
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राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव अलग-अलग क्यों?

संक्षेप में

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर जहां राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया सितंबर 2026 तक टाले जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव एक साथ क्यों नहीं कराए जा रहे हैं? भजनलाल शर्मा सरकार ने इसके पीछे प्रशासनिक व्यवस्था, आचार संहिता और विकास कार्यों की निरंतरता का तर्क दिया है।

मुख्य बातें

  • पंचायतों की आरक्षण लॉटरी सितंबर 2026 तक टली है।
  • 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी पूरी हो चुकी है।
  • राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के चुनाव होने हैं।
  • सरकार ने चुनाव अलग कराने के पीछे विकास कार्यों और प्रशासनिक दबाव को वजह बताया है।
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राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव अलग-अलग क्यों?

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव एक साथ क्यों नहीं? भजनलाल सरकार ने बताया कारण

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर जहां राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया सितंबर 2026 तक टाले जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव एक साथ क्यों नहीं कराए जा रहे हैं? भजनलाल शर्मा सरकार ने इसके पीछे प्रशासनिक व्यवस्था, आचार संहिता और विकास कार्यों की निरंतरता का तर्क दिया है।

पंचायत और नगर निकाय चुनाव अलग-अलग कराने की वजह क्या है?

राज्य सरकार के अनुसार, यदि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव एक साथ घोषित किए जाते हैं तो पूरे प्रदेश में एक ही समय पर आचार संहिता लागू हो जाती। इसका असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों पर पड़ सकता था। आचार संहिता के दौरान नई योजनाओं की घोषणा, कई विकास कार्यों की स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी प्रभाव पड़ता है।

सरकार का तर्क है कि दोनों चुनाव अलग-अलग कराने से एक क्षेत्र में चुनावी प्रक्रिया और आचार संहिता लागू रहने के दौरान दूसरे क्षेत्र में विकास और प्रशासनिक कामकाज को जारी रखा जा सकेगा। इससे प्रदेश में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

प्रशासन पर एक साथ बढ़ता चुनावी दबाव

सरकार ने चुनाव अलग-अलग कराने के पीछे प्रशासनिक दबाव कम करना भी एक प्रमुख वजह बताई है। पंचायत और नगर निकाय चुनाव एक साथ होने पर पुलिस, प्रशासन, चुनाव अधिकारी और बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को एक साथ चुनावी ड्यूटी में लगाना पड़ता। इससे सरकारी विभागों के नियमित कामकाज पर असर पड़ सकता था और आम जनता से जुड़े रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती।

सरकार का कहना है कि दोनों चुनाव अलग-अलग समय पर होने से प्रशासनिक मशीनरी पर एक साथ दो बड़े चुनावों का दबाव नहीं रहेगा और सरकारी कामकाज अपेक्षाकृत सुचारू रूप से चलता रहेगा।

309 नगर निकायों के चुनाव की तैयारी

इधर, राज्य निर्वाचन आयोग प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के चुनाव की तैयारियों में जुटा है। नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी पूरी हो चुकी है। आरक्षण की स्थिति सामने आने के बाद चुनावी मैदान में उतरने वाले संभावित उम्मीदवारों के समीकरण भी बदलने लगे हैं। बीजेपी और कांग्रेस सहित प्रमुख राजनीतिक दलों ने वार्डवार रणनीति और संभावित उम्मीदवारों को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।

पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी सितंबर तक टली

दूसरी ओर, पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के लिए होने वाली आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया को सितंबर 2026 तक टाल दिया गया है। इसके चलते पंचायत चुनावों की प्रक्रिया नगर निकाय चुनावों से अलग समय पर आगे बढ़ने की संभावना है। पंचायत चुनाव की लॉटरी में देरी को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है।

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने आरक्षण लॉटरी टाले जाने पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप लगाया है और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। हालांकि, चुनाव की अंतिम तारीखों और कार्यक्रम को लेकर अब भी राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार है।

क्या राजस्थान में लागू नहीं होगा 'वन स्टेट, वन इलेक्शन'?

पंचायत और नगर निकाय चुनाव अलग-अलग समय पर कराने की सरकार की तैयारी से फिलहाल प्रदेश में 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की अवधारणा लागू होती नजर नहीं आ रही है। सरकार का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को अलग-अलग रखने का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ से ज्यादा प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना और विकास कार्यों को प्रभावित होने से बचाना है।

अब नजर राज्य निर्वाचन आयोग के आगामी चुनाव कार्यक्रम पर है। नगर निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा और पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी की अगली प्रक्रिया के बाद प्रदेश में स्थानीय चुनावों की तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचायत और निकाय चुनाव साथ क्यों नहीं होंगे?

आचार संहिता और प्रशासनिक दबाव के कारण।

कितने नगरीय निकायों में चुनाव होंगे?

309 नगरीय निकायों में।

स्रोत

Rajasthan State Election Commission — आधिकारिक चुनाव संबंधी जानकारी और स्थानीय निकाय चुनाव अपडेट।