उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन का पर्व आस्था और परंपरा के साथ मनाया गया। ब्रह्म मुहूर्त में विशेष पूजन-अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का भस्म से दिव्य शृंगार किया गया और भस्म आरती संपन्न हुई। इसके बाद पुजारी और पुरोहित परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को विशेष राखियां अर्पित कीं। वहीं बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी लगाया गया।रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उज्जैन के बाबा महाकाल के दरबार में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन की शुरुआत सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी अर्पित कर की गई। ब्रह्म मुहूर्त में विशेष पूजन-अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का भस्म से दिव्य शृंगार किया गया और भस्म आरती संपन्न हुई। इसके बाद पुजारी और पुरोहित परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को विशेष राखियां बांधीं। इस वर्ष अर्पित की गई राखियों में शैव और वैष्णव परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिला। एक राखी में भगवान शिव के त्रिशूल, डमरू और रुद्राक्ष के साथ भगवान श्रीकृष्ण के मोरपंख और गोमाता के प्रतीकों को शामिल किया गया था। रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया, जिसकी प्रसादी बाद में श्रद्धालुओं के बीच वितरित की गई। मान्यता है कि श्रावण मास में उपवास रखने वाले कई श्रद्धालु रक्षाबंधन के दिन बाबा महाकाल के महाभोग की प्रसादी ग्रहण कर अपना व्रत खोलते हैं। बाबा महाकाल के दरबार में हुई इस विशेष पूजा और परंपरा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह और भक्तिभाव देखने को मिला।