ब्यावर। सरकना गांव के ग्रामीणों की मांगों को लेकर सरकना संघर्ष समिति का आंदोलन लगातार जारी है। समिति ने श्री सीमेंट के खिलाफ अपना रूख दोहराते हुए कहा कि ग्रामीणों की मांगों का समाधान होने तक संघर्ष जारी रहेगा। समिति के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता में कहा कि उनका उद्देश्य जमीन बेचना नहीं, बल्कि ग्रामीणों के हक, मकानों के विस्थापन तथा खेतों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिलाना है। ग्रामीणों ने बताया कि उनका उदेश्य उद्योग के साथ व्यक्तिगत विवाद करना कतई नहीं है। समिति के अनुसार श्री सीमेंट के संचालन से क्षेत्र में प्रदूषण और ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ी हैं। ग्रामीणों ने कंपनी की गतिविधियों से पर्यावरण एवं जनजीवन पर पड़ रहे कथित प्रभावों को लेकर कई सवाल उठाए। समिति ने दावा किया कि सरकना क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में सात मौतें हुई हैं और इन परिस्थितियों के लिए श्री सीमेंट को जिमम्मेदार माना जा रहा है। समिति के रहमत काठात ने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से इन समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी प्रमुख मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है। संघर्ष समिति ने कहा कि ग्रामीणों के मकानों के विस्थापन तथा खेतों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा उनकी प्रमुख मांग है। समिति का कहना है कि ग्रामीण अपनी जमीन छोडऩे या उसे बेचने के उद्देश्य से आंदोलन नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने अधिकारों और हुए नुकसान के बदले न्यायसंगत मुआवजे की मांग कर रहे हैं। समिति ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों की जमीन उनकी आजीविका का आधार है। ऐसे में किसी भी प्रकार के विस्थापन या कृषि भूमि को हुए नुकसान की स्थिति में प्रभावित परिवारों के हितों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है। प्रेस वार्ता में समिति ने श्री सीमेंट की गतिविधियों में रासायनिक पदार्थों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए। समिति ने आरोप लगाया कि केमिकल के उपयोग से क्षेत्र के पर्यावरण और जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं तथा यह नियमों के विपरीत है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रदूषण के कारण उन्हें नारकीय जीवन जीने को मजबूर होना पड़ रहा है। समिति ने पानी की जांच करवाकर उसकी रिपोर्ट सामने रखने की बात कही। इसके साथ ही ग्रामीणों ने पानी में प्रदूषण, दूषित जल और मकानों में आई दरारों से संबंधित तस्वीरों को भी प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करने का दावा किया। समिति का कहना है कि इन तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। समिति ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जताई। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों की समस्याएं किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को बुलावे का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि क्षेत्र की समस्या को अपना समझकर स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचना चाहिए। समिति ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान कराने के लिए संबंधित स्तर पर आवाज उठाना जनप्रतिनिधियों की जिम्ममेदारी है। प्रेस वार्ता के दौरान समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान समिति की ओर से कभी अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया गया। समिति ने कहा कि उनका आंदोलन ग्रामीणों की मांगों और अधिकारों को लेकर है तथा इसे शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। समिति ने कहा कि आंदोलन को किसी अन्य रूप में प्रस्तुत करने के बजाय ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं और मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। समिति ने दो टूक कहा कि जब तक ग्रामीणों की मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक सरकना और श्री सीमेंट के बीच सीधी लड़ाई जारी रहेगी। समिति ने कहा कि आंदोलन में वही लोग शामिल हैं जो ग्रामीणों के हितों और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। समिति ने यह भी कहा कि जिसका कंपनी से किसी प्रकार का स्वार्थ जुड़ा हुआ है, वह इस आंदोलन में उनके साथ नहीं है। समिति पदाधिकारियों ने दोहराया कि ग्रामीणों का उद्देश्य किसी कंपनी के साथ व्यक्तिगत विवाद करना नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों के हितों की रक्षा करना है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों का जमीन बेचने का कतई मकसद नहीं है। समिति के अनुसार यह लड़ाई जमीन के उचित उपयोग, ग्रामीणों के अधिकार, विस्थापन से प्रभावित परिवारों के हित और खेतों को हुए नुकसान के उचित मुआवजे को लेकर है। समिति ने कहा कि ग्रामीण अपनी आने वाली पीढ़ीयों के भविष्य और क्षेत्र के पर्यावरण को लेकर भी चिंतित हैं। प्रेस वार्ता में रहमत काठात, मुकेश काठात, सलीम खान लसाडिया, भगु सिंह अंधेरी देवरी, अमीन काठात लुलवा, लाल सिंह खीमपुरा, जसवंत बाना बलाड, दुष्यंत सिंह अतितमंड सहित अन्य ग्रामीण एवं समिति पदाधिकारी मौजूद रहे। समिति ने कहा कि ग्रामीणों की मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।