Monday, 28 September 2026
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शाजापुर जिला अस्पताल में लापरवाही: 5 साल के मासूम की मौत, एम्बुलेंस के इंतजार में दो घंटे तड़पता रहा परिवार

संक्षेप में

शाजापुर जिला अस्पताल में 5 वर्षीय हार्दिक जाटव की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर 108 एम्बुलेंस न मिलने और अस्पताल की देरी के कारण बच्चे को इंदौर रेफर नहीं किया जा सका, जबकि प्रशासन ने लापरवाही से इंकार किया है।

मुख्य बातें

  • मृतक की पहचान 5 वर्षीय हार्दिक जाटव के रूप में हुई है।
  • परिजनों का आरोप है कि 2 घंटे तक 108 एम्बुलेंस नहीं मिली।
  • सिविल सर्जन डॉ. बीएस मीणा के अनुसार बच्चे को डबल निमोनिया था।
मध्य प्रदेश
शाजापुर जिला अस्पताल में लापरवाही: 5 साल के मासूम की मौत, एम्बुलेंस के इंतजार में दो घंटे तड़पता रहा परिवार

शाजापुर जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पेट दर्द और बुखार से पीड़ित पांच साल के एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर 108 एम्बुलेंस न मिलने और अस्पताल प्रशासन की देरी के कारण बच्चे की जान चली गई।

मृतक की पहचान पांच वर्षीय हार्दिक जाटव के रूप में हुई है। बच्चे के पिता बंटी जाटव ने बताया कि उसे रात के समय अस्पताल लाया गया था, जहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उसकी स्थिति गंभीर बताते हुए तुरंत इंदौर रेफर करने की बात कही थी।

दो घंटे तक भटकता रहा परिवार

परिजनों के मुताबिक, डॉक्टरों ने बिना ऑक्सीजन सपोर्ट वाली एम्बुलेंस से बच्चे को ले जाने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद पिता करीब दो घंटे तक 108 एम्बुलेंस के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन वाहन समय पर उपलब्ध नहीं हो सका। मजबूरी में जब एक निजी एम्बुलेंस चालक से बात की गई, तो उसने 8,000 रुपये की मांग की।

पिता का आरोप है कि सुबह करीब 6:30 बजे जब सरकारी एम्बुलेंस अस्पताल पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और बच्चे की सांसें थम चुकी थीं। यदि एम्बुलेंस समय पर मिल जाती, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष

मामले पर सफाई देते हुए सिविल सर्जन डॉ. बीएस मीणा ने बताया कि बच्चा जब अस्पताल लाया गया था, तब उसकी हालत बेहद नाजुक थी। उसे डबल निमोनिया था और सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही थी।

डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि अस्पताल लाने से पहले बच्चे का कहीं और झाड़-फूंक या अन्य तरीके से इलाज कराया गया था। अस्पताल प्रशासन ने किसी भी तरह की लापरवाही से इंकार करते हुए कहा है कि डॉक्टरों ने बच्चे का पूरा इलाज किया और 108 एम्बुलेंस के लिए तुरंत कॉल कर दिया गया था।

आपातकालीन सेवाओं पर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर जिला स्तर पर आपातकालीन स्वास्थ्य और परिवहन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार सिस्टम की लाचारी और देरी का दर्द बयां कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल प्रबंधन अपनी प्रक्रिया को सही ठहरा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शाजापुर जिला अस्पताल में किस बच्चे की मौत हुई है?

शाजापुर जिला अस्पताल में पांच साल के मासूम हार्दिक जाटव की इलाज के दौरान मौत हो गई।

परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर क्या आरोप लगाया है?

परिजनों का आरोप है कि समय पर 108 एम्बुलेंस न मिलने और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण बच्चे को समय पर इंदौर रेफर नहीं किया जा सका, जिससे उसकी जान चली गई।

अस्पताल प्रशासन ने इस मामले में क्या सफाई दी है?

सिविल सर्जन डॉ. बीएस मीणा ने बताया कि बच्चे को डबल निमोनिया था और उसकी हालत बेहद गंभीर थी। डॉक्टरों ने पूरा इलाज किया और 108 एम्बुलेंस के लिए तुरंत कॉल कर दिया था, अस्पताल की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई।

बच्चे की मौत का मुख्य कारण क्या बताया गया है?

डॉक्टरों के अनुसार बच्चे को गंभीर डबल निमोनिया था और सांस लेने में तकलीफ थी, जबकि परिजनों का कहना है कि समय पर एम्बुलेंस मिलने से उसकी जान बच सकती थी।