जयपुर के ज्योति नगर इलाके में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 90 साल के एक रिटायर्ड जिला जज को करीब 15 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर 2.5 करोड़ रुपए की ठगी कर ली गई। खुद को सीबीआई और आरबीआई का अधिकारी बताने वाले ठगों ने उन पर 50 करोड़ के हवाला मामले में गिरफ्तारी का दबाव बनाया था।
पीड़ित गणपत सिंह भंडारी के भतीजे रविंद्र सिंह मोहनावत ने ज्योति नगर थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है और ठगी गई रकम में से 14 लाख रुपए होल्ड कराने में सफलता मिली है।
व्हाट्सएप वीडियो कॉल से शुरू हुआ जाल
शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई को गणपत सिंह भंडारी के पास एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया था। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को मुंबई में तैनात सीबीआई अधिकारी बताया और पुलिस की वर्दी पहन रखी थी। कॉलर ने दावा किया कि मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें से 40 लाख रुपए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में उनके खाते में ट्रांसफर किए गए हैं।
ठगों ने उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी और कहा कि अगर जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें तुरंत मुंबई तलब किया जाएगा। डर और बदनामी के इस माहौल में ठगों ने उनके एक पारिवारिक सदस्य को भी मामले में घसीटने की धमकी दी। इसके बाद से आरोपी लगातार वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखे हुए थे।
15 दिन तक रखा निगरानी में, मिटाए चैट्स
ठगों ने जज को हिदायत दी थी कि वे जांच पूरी होने तक इस बारे में परिवार या किसी अन्य व्यक्ति से कोई बात न करें। उन्हें हर बातचीत के बाद व्हाट्सएप चैट, कॉल लॉग और अन्य मैसेज डिलीट करने को कहा गया था। लगातार दबाव के चलते वे 3 अगस्त से 10 अगस्त के बीच अलग-अलग खातों में करीब 2.5 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर चुके थे।
यह सिलसिला तब रुका जब बुधवार सुबह वे जोहरी बाजार स्थित एसबीआई की शाखा में और पैसे ट्रांसफर करने पहुंचे। बैंक मैनेजर को शक हुआ तो उन्होंने पूछताछ की। पूरी बात जानने के बाद मैनेजर ने तुरंत ट्रांजैक्शन रोक दिया और साइबर फ्रॉड की आशंका जताते हुए उनके भतीजे को सूचना दी।
पुलिस जांच और कार्रवाई
ज्योति नगर SHO गुंजन वर्मा ने बताया कि बुधवार को इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद पीड़ित के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस खातों की डीटेल खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी गई रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और कहां निकाली गई।
