केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरियाणा में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। शाह ने संसद की कार्यवाही में बाधा डालने और सड़क पर विरोध प्रदर्शन की शैली पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी को खुली चुनौती दी कि अगर उन्हें संसद में चर्चा रास नहीं आती, तो वे हरियाणा के किसी भी चौराहे पर आकर बहस कर सकते हैं, जहां भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष उनसे आमने-सामने बातचीत करने के लिए तैयार हैं।
संसद बनाम सड़क की राजनीति पर वार
अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने नरेंद्र मोदी को लगातार तीसरी बार देश की कमान सौंपी है, ऐसे में लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को संसद के भीतर हंगामा करने के बजाय जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। शाह के मुताबिक, कांग्रेस संसद की कार्यवाही को बाधित कर रही है और जरूरी विधाई कार्यों के बजाय केवल शोर-शराबे में उलझी रहती है।
गृह मंत्री ने विपक्ष के प्रदर्शन के तौर-तरीकों पर भी कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि पहले संसद के भीतर व्यवधान पैदा किया जाता है और उसके बाद सड़कों पर भीड़ इकट्ठा कर अराजकता का माहौल बनाया जाता है। शाह ने राहुल गांधी के राजनीतिक रवैये की तुलना उस स्थिति से की, जब कोई व्यक्ति रास्ता भटकने के बाद हताशा में गलत दिशा में आगे बढ़ने लगता है।
SIR और घुसपैठियों के मुद्दे पर घेरा
राजनीतिक बयानबाजी के बीच शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस गंभीर मसले पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
एसआईआर चुनावी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है, जिसके जरिए मतदाता सूची की शुचिता जांची जाती है। इसमें पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना और सूची से दोहरे या फर्जी नामों को हटाना शामिल है। विपक्ष इस प्रक्रिया पर बेवजह सवाल खड़े कर रहा है, जबकि हम हर मंच पर चर्चा के लिए तत्पर हैं। — अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
इसके अलावा, गृह मंत्री ने घुसपैठियों के मुद्दे पर भी कांग्रेस नेतृत्व को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल और उनके नेता राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों पर स्पष्ट रुख अपनाने के बजाय घुसपैठियों के पक्ष में खड़े नजर आते हैं।
आगे क्या
अमित शाह के इस तीखे तेवर के बाद अब सियासी हलकों की निगाहें कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं। यह देखना अहम होगा कि विपक्षी खेमा हरियाणा में खुली बहस की चुनौती पर क्या रुख अपनाता है या फिर संसद के भीतर ही अपने विरोध की रणनीति पर कायम रहता है।
