महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा अमेजन रिटेल इंडिया के भिवंडी वेयरहाउस पर की गई कार्रवाई न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए एजेंसी के रवैये पर कड़े सवाल उठाए और कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने की नसीहत दी। अदालत ने टिप्पणी की कि नियमों को लागू करने में एजेंसी जरूरत से ज्यादा आक्रामक रुख अपना रही है।

'क्या हर मामले में प्रतिष्ठान बंद करना ही समाधान?'

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान FDA की कार्रवाई के तौर-तरीकों पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "हमें आपको यह बताना पड़ रहा है कि अपनी नीतियों को सख्ती से लागू करने के प्रयास में आप मच्छर मारने के लिए तलवार चला रहे हैं।" पीठ ने एजेंसी से सवाल किया कि क्या हर मामूली या शुरुआती गलती के मामले में सीधे प्रतिष्ठान को पूरी तरह बंद कर देना ही एकमात्र विकल्प है।

अमेजन रिटेल इंडिया ने FDA की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। FDA का आरोप है कि कंपनी का भिवंडी स्थित यह वेयरहाउस नष्ट किए जाने वाले एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों को खुले बाजार में दोबारा भेज रहा था। कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया कि FDA अधिकारियों ने 24 जून को वेयरहाउस का औचक निरीक्षण किया था और अगले ही दिन लाइसेंस निलंबित कर दिया। कंपनी का मुख्य तर्क है कि इस कार्रवाई से पहले उन्हें सुधार के लिए कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया था।

अपील लंबित होने के बावजूद लाइसेंस रद्द

विवाद तब और गहरा गया जब कंपनी ने लाइसेंस निलंबन के खिलाफ विभागीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर की, लेकिन इसके बावजूद FDA ने 1 जुलाई को नया कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया और बाद में लाइसेंस रद्द भी कर दिया।

इस प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि जब कानूनी अपील पहले से ही लंबित थी, तो ऐसी स्थिति में लाइसेंस रद्द करने का आदेश कैसे जारी किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्थापित कानून के मुताबिक अपील की निर्धारित अवधि के दौरान इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।

10 अगस्त को अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील नेहा भिड़े ने अदालत से इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त के लिए तय की है। अब इस मामले में FDA के हलफनामे और उसके कानूनी पक्ष पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।